रांची। झारखंड कैबिनेट द्वारा पेसा (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों में) नियमावली को मंज़ूरी दिए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने इसे अपने लंबे संघर्ष की जीत बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पेसा नियमावली का पारित होना भाजपा और एनडीए के उस निरंतर दबाव का परिणाम है, जो सड़क से लेकर सदन तक बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह फैसला दर्शाता है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर भाजपा का संघर्ष रंग लाता है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में पेसा कानून की नियमावली लंबे समय से लंबित थी। भाजपा ने लगातार यह मांग उठाई कि पेसा को उसकी मूल भावना और पारंपरिक रूढ़ि व्यवस्था के अनुरूप लागू किया जाए, ताकि ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार मिल सकें। उन्होंने कहा कि कैबिनेट से पारित नियमावली का भाजपा स्वागत करती है और यह उम्मीद करती है कि यह नियमावली संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुरूप ही तैयार की गई होगी।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नियमावली में संविधान की पांचवीं अनुसूची की भावना के विपरीत कोई भी बदलाव या छेड़छाड़ की गई है, तो भाजपा इसका कड़ा विरोध करेगी। मरांडी ने कहा कि पेसा कानून का मूल उद्देश्य आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त करना है, न कि उसे कमजोर करना। यदि इस नियमावली के जरिए ग्राम सभा के अधिकारों में कटौती की कोशिश की गई, तो पार्टी इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा यह सुनिश्चित करेगी कि पेसा नियमावली पूरी तरह से पारंपरिक रूढ़ि व्यवस्था और आदिवासी समाज की परंपराओं पर आधारित हो। इसके लिए पार्टी महामहिम राज्यपाल का भी ध्यान इस ओर आकृष्ट करेगी, ताकि कानून को अंतिम रूप दिए जाने से पहले संवैधानिक प्रावधानों और पारंपरिक व्यवस्थाओं का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा का सबसे अहम संवैधानिक औजार है। ऐसे में इसमें किसी भी प्रकार का समझौता आदिवासी समाज के साथ अन्याय होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में राज्य सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन भाजपा के लगातार आंदोलन, दबाव और सदन में उठाई गई आवाज़ के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा आगे भी इस मुद्दे पर सतर्क रहेगी और नियमावली के हर प्रावधान पर नज़र रखेगी। यदि कहीं भी आदिवासी हितों की अनदेखी होती है, तो भाजपा सड़क से सदन तक संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेगी। मरांडी ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य केवल नियमावली का पारित होना नहीं, बल्कि उसका सही और ईमानदार क्रियान्वयन है, ताकि आदिवासी समाज को उसका संवैधानिक अधिकार वास्तविक रूप से मिल सके।
अंत में उन्होंने कहा कि यह फैसला झारखंड की जनता, विशेषकर आदिवासी समाज के लिए महत्वपूर्ण है और भाजपा यह सुनिश्चित करेगी कि पेसा कानून सत्ता की मंशा का नहीं, बल्कि संविधान और परंपरा की भावना का प्रतिबिंब बने।

