ISRO की ऐतिहासिक छलांग: एलवीएम3 रॉकेट ने अब तक का सबसे भारी कमर्शियल सैटेलाइट ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 सफलतापूर्वक किया लॉन्च

Ravikant Upadhyay

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को अंतरिक्ष विज्ञान और व्यावसायिक प्रक्षेपण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार), श्रीहरिकोटा से इसरो के शक्तिशाली एलवीएम3-एम6 रॉकेट ने अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित कर दिया। यह मिशन भारत की वैश्विक कमर्शियल लॉन्च क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित हुआ है।

एलवीएम3 रॉकेट का यह प्रक्षेपण सुबह 8:54 बजे सेकंड लॉन्च पैड से किया गया। 43.5 मीटर ऊंचा और लगभग 640 टन वजनी यह रॉकेट अब तक का सबसे भारी पेलोड लेकर अंतरिक्ष में गया। 6,100 किलोग्राम वजनी ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को करीब 15 मिनट की उड़ान के बाद 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर 53 डिग्री इंक्लिनेशन वाली सर्कुलर ऑर्बिट में सटीक रूप से स्थापित किया गया। यह उपलब्धि एलवीएम3 रॉकेट के इतिहास में मील का पत्थर मानी जा रही है।

यह एलवीएम3 सीरीज की छठी सफल उड़ान है, जिसने अब तक 100 प्रतिशत सफलता दर बनाए रखी है। इससे पहले यही रॉकेट चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब के 72 सैटेलाइट्स जैसे अहम मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। मौजूदा मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के माध्यम से किए गए एक समर्पित कमर्शियल करार का हिस्सा है, जो भारत के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिक संभावनाओं को दर्शाता है।

ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट एएसटी स्पेसमोबाइल की अगली पीढ़ी की तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें 223 वर्ग मीटर का विशाल फेज्ड एरे लगा है, जिसे लो अर्थ ऑर्बिट में अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन एरे माना जा रहा है। इस सैटेलाइट का उद्देश्य सीधे सामान्य स्मार्टफोन पर 4जी और 5जी सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिसमें वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, मैसेजिंग, स्ट्रीमिंग और इंटरनेट डेटा शामिल हैं। इसके लिए किसी अतिरिक्त हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी।

एएसटी स्पेसमोबाइल पहले ही ब्लू बर्ड सीरीज के सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है, जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में कवरेज प्रदान कर रहे हैं। नए ब्लॉक-2 सैटेलाइट्स दस गुना अधिक बैंडविड्थ उपलब्ध कराएंगे और दुनिया भर में मौजूद कनेक्टिविटी गैप को पाटने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे। कंपनी का लक्ष्य उन लगभग 6 अरब मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक नेटवर्क पहुंचाना है, जो आज भी दूरदराज के इलाकों में संचार सुविधाओं से वंचित हैं। पहाड़ों, रेगिस्तानों और महासागरों जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी निर्बाध कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी।

इसरो चेयरमैन वी. नारायणन ने लॉन्च से पहले तिरुमाला मंदिर में पूजा-अर्चना कर मिशन की सफलता की कामना की थी। यह मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत को वैश्विक स्पेस मार्केट में एक भरोसेमंद और मजबूत लॉन्च सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

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