रांची। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की तबीयत अचानक खराब होने की खबर सामने आई है। इस संबंध में उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपनी सेहत, मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य विभाग के प्रति अपने समर्पण की बात कही है। मंत्री की इस पोस्ट के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
अपने फेसबुक पोस्ट में डॉ. इरफान अंसारी ने लिखा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है, शरीर थका हुआ है और मन भी बोझिल महसूस कर रहा है। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद से उन्होंने अपना आराम, अपनी सेहत और निजी जीवन को पूरी तरह झारखंड की जनता के नाम कर दिया है। उन्होंने लिखा कि दिन हो या रात, गांव हो या शहर, वे मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मेडिकल यूनिवर्सिटी, सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक लगातार निरीक्षण और काम कर रहे हैं।
डॉ. अंसारी ने पोस्ट में कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य यह है कि झारखंड का कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में टूटे नहीं या बिखरे नहीं। उन्होंने लिखा कि चार करोड़ झारखंडवासी उनसे उम्मीद लगाए बैठे हैं और उस भरोसे का बोझ वे हर दिन अपने सीने पर महसूस करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इलाज हर इंसान का अधिकार है, चाहे वह अमीर हो या गरीब, और इसी न्याय को जमीन पर उतारने के लिए वे रोज संघर्ष कर रहे हैं।
हालांकि, मंत्री ने अपने पोस्ट में कुछ लोगों और तथाकथित पत्रकारों पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने लिखा कि उन्हें तब गहरी पीड़ा होती है, जब कुछ गैर-जिम्मेदार और स्वार्थी लोग दिन-रात स्वास्थ्य विभाग को बदनाम करने का काम करते हैं। डॉ. अंसारी ने कहा कि इतनी मेहनत, ईमानदारी और समर्पण के बावजूद केवल आरोपों का सामना करना पड़ता है, जो मन को भीतर तक तोड़ देता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कहीं कोई कमी, समस्या या तकलीफ है, तो उसे सीधे उनके संज्ञान में लाया जाए, न कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पर राजनीति बेहद निर्दयी होती है। उन्होंने जनता से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि सुधार की प्रक्रिया की यह अभी शुरुआत है।
डॉ. इरफान अंसारी ने भरोसा दिलाया कि आने वाला समय बताएगा कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था देश की बेहतरीन व्यवस्थाओं में शामिल होगी। उन्होंने लिखा कि भले ही आज उनकी तबीयत खराब है, लेकिन फाइलें रुक नहीं सकतीं और फैसले टल नहीं सकते, क्योंकि किसी मां को अपने बेटे का इलाज चाहिए और किसी गरीब को उम्मीद।
पोस्ट के अंत में उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उन्हें आराम से ज्यादा लोगों की जिंदगी प्यारी है और जनता के विश्वास की कसम खाकर उन्होंने दोहराया कि वे हार नहीं मानेंगे और झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को बदलकर ही दम लेंगे।

