नयी दिल्ली 29 मार्च (लाइव 7) देश की स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के अंतर्गत 36.9 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा है कि आयुष्मान भारत योजना देश में स्वास्थ्य सेवा का परिदृश्य बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और स्वास्थ्य देखभाल पर लोगों का निजी व्यय कम हो रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार एबी पीएम-जेएवाई, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) जैसी सरकार समर्थित बीमा योजनाएं और राज्य-विशिष्ट कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवा वित्तपोषण में 2.63 प्रतिशत का योगदान करते हैं और सरकारी स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि ने परिवारों के लिए वित्तीय कठिनाई को काफी कम कर दिया है। वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2022 के बीच, सरकारी स्वास्थ्य व्यय (जीएचई) 29.0 प्रतिशत से बढ़कर 48.0 प्रतिशत हो गया, जबकि निजी व्यय- आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (ओओपीई) 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत रह गया। योजना के अंतर्गत 24 मार्च 2025 तक 36.9 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में कहा गया है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से आम जनता को 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। योजना में सरकार ने लाभार्थी आधार 12 करोड़ परिवारों तक पहुँचाया।
मार्च 2024 में, इस योजना के तहत पात्रता मानदंड का विस्तार करके 37 लाख मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ( ), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (एडब्ल्यूडब्ल्यू), आंगनवाड़ी सहायिका (एडब्ल्यूएच) और उनके परिवारों को शामिल किया गया। इसके अलावा, 29 अक्टूबर 2024 को, सरकार ने 4.5 करोड़ परिवारों से संबंधित 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार लाभ प्रदान किया।
योजना के अनुसार अस्पताल पात्र लाभार्थियों को उपचार देने से इनकार नहीं कर सकते। पैनल में शामिल अस्पताल के सेवाओं से इनकार किए जाने की स्थिति में, लाभार्थी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एबी पीएम-जेएवाई के तहत, स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करने में लाभार्थियों की समस्याओं को हल करने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन-स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली बनाई गई है। प्रत्येक स्तर पर शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारी और शिकायत निवारण समितियाँ हैं।
लाभार्थी वेब आधारित पोर्टल, केन्द्रीयकृत शिकायत निवारण प्रबंधन प्रणाली, केन्द्रीय एवं राज्य कॉल सेंटर फोन- 14555, ईमेल, राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों को पत्र आदि सहित विभिन्न माध्यमों का उपयोग करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इन-पेशेंट सेवाओं वाले सभी सरकारी अस्पतालों को एबी पीएम-जेएवाई के अंतर्गत सूचीबद्ध माना जाता है। इसके अलावा, सार्वजनिक अस्पतालों को इस योजना के तहत प्रदान की गई सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों के बराबर प्रतिपूर्ति की जाती है। योजना में शामिल उपचार लाभ के 350 पैकेजों के लिए दरों में वृद्धि की गई है और नए पैकेज जोड़े गए हैं।दावा निपटान की निगरानी उच्चतम स्तर पर की जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि दावे का निपटान निर्धारित समय के भीतर हो जाए।
सत्या,
लाइव 7
आयुष्मान भारत योजना में 36.9 करोड़ से अधिक कार्ड

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