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मर्यादा में रहें जदयू नेता : भाजपा

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पटना: सम्राट अशोक की तुलना मुगल शासक औरंगजेब से करने के बाद से ही बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख घटक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में चली आ रही तल्खी के बीच आज प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने जदयू नेताओं को मर्यादा में रहने की नसीहत दी है।
सम्राट अशोक को लेकर उपजे विवाद और फिर दोनों दलों की तरफ से लगतातार हो रही बयानबाजी के बाद बिहार भाजपा के अध्यक्ष एवं सांसद संजय जायसवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जदयू पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राजग की मर्यादा का ख्याल एकतरफा नहीं चलेगा। उन्होंने जदयू नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि यही रवैया रहा तो भाजपा की तरफ से भी ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।
श्री जायसवाल ने कहा कि भाजपा के पास भी 76 लाख कार्यकर्ता हैं। साथ ही उन्होंने बगैर नाम लिए हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन ंिसह उर्फ ललन ंिसह एवं संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को भी निशाने पर लिया है। साथ ही यह भी कह दिया कि भाजपा को जवाब देने आता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “चलिए माननीय जी को यह समझ आ गया कि राजग गठबंधन का निर्णय केंद्र द्वारा है और बिल्कुल मजबूत है इसलिए हम सभी को साथ चलना है। फिर बार-बार महोदय मुझे और केंद्रीय नेतृत्व को टैग कर न जाने क्यों प्रश्न करते हैं। राजग गठबंधन को मजबूत रखने के लिए हम सभी को मर्यादाओं का ख्याल रखना चाहिए। यह एकतरफा अब नहीं चलेगा। श्री जायसवाल ने कहा कि ‘इस मर्यादा की पहली शर्त है कि देश के प्रधानमंत्री से ट्विटर-ट्विटर ना खेलें। प्रधानमंत्री प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता के गौरव भी हैं और अभिमान भी। उनसे अगर कोई बात कहनी हो तो जैसा माननीय ने लिखा है कि बिल्कुल सीधी बातचीत होनी चाहिए। ट्विटर-ट्विटर खेलकर यदि उनपर सवाल करेंगे तो बिहार के 76 लाख भाजपा कार्यकर्ता इसका जवाब देना अच्छे से जानते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में हम सब इसका ध्यान रखेंगे।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने इसके साथ ही यह भी कहा, “आप सब बड़े नेता है। एक बिहार मे एवं दूसरे केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। फिर इस तरह की बात कहना कि राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए पुरस्कार को प्रधानमंत्री वापस लें, से ज्यादा बकवास हो ही नहीं सकता। दयाप्रकाश सिन्हा के हम आप से सौ गुना ज्यादा बड़े विरोधी हैं क्योंकि आपके लिए यह मुद्दा बिहार में शैक्षिक सुधार जैसा मुद्दा है जबकि जनसंघ और भाजपा का जन्म ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर हुआ है। हम अपनी संस्कृति और भारतीय राजाओं के स्वर्णिम इतिहास में कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकते। लेकिन, हम यह भी चाहते हैं कि बख्तियार खिलजी से लेकर औरंगजेब तक के अत्याचारों की सही गाथा आने वाली पीढ़ियों को बताई जाए।”

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