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नौसेना प्रमुख ने क्यों कहा हिन्द -प्रशांत क्षेत्र में टकराव की सम्भावना कभी भी बढ़ सकती है ?

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में जिस तरह के विवाद हैं उनके कारण वहां किसी भी समय टकराव पूर्ण स्थिति बन सकती है

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न्यूज़ डेस्क

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में जिस तरह के विवाद हैं उनके कारण वहां किसी भी समय टकराव पूर्ण स्थिति बन सकती है लेकिन भारतीय नौसेना वहां कड़ी नजर रख रही है और हर स्थिति से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
नौसेना प्रमुख ने नौसेना दिवस से पहले आज यहां वार्षिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए हिन्द प्रशांत क्षेत्र की स्थिति के बारे में पूछे सवाल के जवाब में कहा कि वहां कुछ विवाद हैं और ये टकराव का रूप भी ले सकते हैं। इसके अलावा वहां डकैती से लेकर तस्करी तथा आपदाओं के समय विभिन्न तरह के अभियान चलाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि हिंद प्रशांत में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए परस्पर संवाद जरूरी है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत खुले , मुक्त, स्वतंत्र तथा नियम आधारित हिंद प्रशांत क्षेत्र का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में भारत हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहा है और किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम है।

हिंद महासागर के बारे में एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि सागर साझा धरोहर माने जाते हैं । महासागरों में हर देश कानूनी रूप से अपनी आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। चीन को भी वहां आर्थिक गतिविधियों का अधिकार है। क्षेत्र में भारत एक नौसैनिक ताकत है और वह हर देश की गतिविधि पर करीबी नजर रखता है । उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारतीय हितों की रक्षा करना नौसेना की प्राथमिकता है।

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एडमिरल कुमार ने कहा कि जहां नौसेना के युद्धपोत और अन्य प्लेटफार्म हिन्द महासागर तथा हिन्द प्रशांत में तैनात रहते हैं वहीं हमारे प्लेटफार्म विभिन्न मित्र देशों की यात्राओं पर भी जाते हैं। इसके अलावा वे विभिन्न अभियानों में हिस्सा लेने के साथ-साथ अनेक देशों की नौसेनाओं के साथ द्विपक्षीय तथा संयुक्त अभ्यास में भी हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि इससे नौसेनाओं के बीच परस्पर विश्वास तो बढ़ता ही है इनमें तालमेल तथा सहयोग भी बढ़ता है। युद्धपोतों की विभिन्न जगहों पर तैनाती से जहां क्षेत्र में निगरानी की जाती है वहीं अलग-अलग अभियानों में हिस्सा लेने से उसकी विश्वसनीयता बढ़ती है।
नौसेना के लिए दूसरे विमानवाहक पोत के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत बनाने के बाद अब नौसेना आश्वस्त है कि उसे इस क्षेत्र में महारत हासिल हो गयी है और अब अधिक आधुनिक विमानवाहक पोत को भी कम समय में बनाया जा सकता है।रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आयात पर निर्भरता कम होती है और कलपुर्जों तथा उपकरणों की आपूर्ति के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
मालदीव में नयी सरकार के आने के बाद के घटनाक्रम पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि मालदीव के साथ भारतीय नौसेना का घनिष्ठ सहयोग है। पिछले पांच वर्षों से वहां हमारे प्लेटफार्म हैं और उम्मीद है कि यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मालदीव से भारतीय सैनिकों की तैनाती में कमी के बारे में निर्णय दोनों देशों की सरकारों के स्तर पर लिया जायेगा।
नौसेना में हाल ही में एक महिला अग्निवीर की आत्महत्या से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और इस मामले की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि नौसेना सैनिकों के साथ नियमित संपर्क और संवाद बनाये रखने का पूरा प्रयास करती है और अब विशेष परिस्थितियों का सामना करने वाले नौ सैनिकों की मदद के लिए मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति करने पर भी विचार कर रही है जिससे कि सैनिकों की काउंसलिंग की जा सके।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नौसेना में महिलाओं को किसी भी यूनिट या प्लेटफार्म पर तैनात किया जा सकता है लेकिन पनडुब्बी और अन्य संवेदनशील जगहों पर तैनाती से पहले एक तो महिला नौसैनिक को अपनी इच्छा व्यक्त करनी होगी और दूसरा इसके लिए कठिन प्रशिक्षण की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
               उन्होंने कहा कि नौसेना में महिला अग्नि वीरों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और जहां पहले बैच में करीब ढाई सौ महिला थी तो दूसरे बैच में 450 के करीब तथा तीसरे बैच में करीब एक हजार महिला अग्नि वीरों को लिया जायेगा।
एक अन्य सवाल के जवाब में नौसेना प्रमुख ने कहा कि जहां चीन की नौसेना नयी नयी प्रौद्योगिकी विकसित कर रही है वहीं वह पाकिस्तान की नौसेना को भी विस्तार तथा आधुनिकीकरण में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत इस पर कड़ी नजर रखे हुए है और उसी के अनुरूप अपनी नीतियों तथा नीतियों में बदलाव करता रहता है।
उन्होंने कहा कि अभी नौसेना के 67 युद्धपोत तथा अन्य प्लेटफार्म में से 65 देश में ही बनाये जा रहे हैं और भारतीय नौसेना वर्ष 2047 तक पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जायेगी। इनपुट वार्ता के साथ
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