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आखिर दिग्विजय सिंह ने क्यों कहा कि लोकतंत्र बचाना है तो शिवराज सरकार को हटानी होगी

मध्यप्रदेश मे काँग्रेस और बीजेपी अपने वजूद कि लड़ाई लड़ रही है

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दिल्ली डेस्क

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मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव में सत्ता किसके पास जाएगी अभी इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी हो सकती है। मौजूदा बीजेपी सरकार लगातार करीब दो दशक से सत्ता में है और इस बार फिर सड़े वह सत्ता में बने रहे की लड़ाई लड़ रही है। उधर कांग्रेस किसी भी सूरत में सत्ता में लौटने को बेकरार है। कांग्रेस को लग रहा है कि अगर इस बार सत्ता नहीं मिली तो खेल ख़राब होगा और इसका असर लोकसभा चुनाव पर भी पडेगा। इसलिए बीजेपी और कांग्रेस अपने वजूद  की लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में अभी कुछ भी आंकलन करना  ठीक नहीं है।

                  बीजेपी -काँग्रेस मे कांटे का मुकाबला

वैसे पिछले चुनाव में भी कांग्रेस ने बीजेपी को बड़ा झटका देते हुए सत्ता तक पहुँच गई थी। 15 महीने कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार भी चली लेकिन ऑपरेशन कमल के जरिये कमलनाथ मि सरकार को गिरा दी गई। बीजेपी ने सिंधिया के जातीय यह सब खेल किया। लेकिन इस बार कांग्रेस सतर्क है और आक्रामक भी। तमाम सर्वे भी बताए रहे हैं कि कांग्रेस आगे चल रही है और बीजेपी की मुश्किलें बढ़ रही है। लेकिन उम्मीद यह भी की जा रही है कि संघ की टीम अंतिम समय में कोई बड़ा खेला कर सकती है और ताकि ब्ज्प को लाभ मिल सके। जो मतदाता बीजेपी से नाराज चल रहे हैं उसे फिर से मनाने की कोशिश की जा रही है। अगर इस खेल में संघ और बीजेपी के लोग सफल हो गए तो बीजेपी की स्थिति ठीक हो सकती है और ऐसे में यह भी संभव है कि किसी भी पार्टी की सरकार न बने और विधान सभा हंग हो जाए।

                   हंग भी हो सकता है विधान सभा

हंग विधान की बात इसलिए की जा रही है कि क्योंकि शुरूआती दौर में भले ही मध्यप्रदेश में लड़ाई कांग्रेस और बीजेपी के बीच लगती हो लेकिन अब वहां कलहल बदलने भी लगा है। देश की तमाम पार्टियां मध्य प्रदेश के चुनावी मैदान में है। कांग्रेस बीजेपी के बीच भले ही मुख्य मुकाबला है लेकिन आप ,बसपा ,सपा और कई और [पार्टियां करीब दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी को मुलाबला भी दे रही है। अगर इन सीटों पर कोई तीसरी  पार्टी ने खेल किया तो मध्य प्रदेश के परिणाम हंग  हो सकते हैं। सर्वे रिपोर्ट भी बता रहे हैं कि कांग्रेस को जहाँ 46 फीसदी वोट मिल सकते हैं जबकि 43 फीसदी वोट बीजेपी के फेवर में जा सकते हैं। ऐसे में साफ़ तौर पर लगता है कि दोनों दलों के बीच कोई बड़ा अन्तर नहीं है। हार जीत का फैसला काम अंतर से ही होना है जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था। फिर भी कांग्रेस का जिस तरह का मिजाज दिख रहा है उससे साफ़ जाहिर होता है कि वह कई अगली रणनीति पर भी काम कर रही है। कमलनाथ के साथ दिग्विजय सिंह की जोड़ी को जनता पसंद भी कर रही है और दिग्विजय सिंह काफी आक्रामक भी होते जा रहे हैं। आज ही दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए आज कहा कि लोकतंत्र को अगर बचाना है, तो इस सरकार को हटाना ही होगा।

          दिग्विजय सिंह ने क्या कहा ?

सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कतिपय मीडिया में आज छपी गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी एक खबर को पोस्ट किया। इस पोस्ट के साथ उन्होंने श्री शाह के संदर्भ में कहा, ‘असल में यह सत्ता का अहंकार है कि शाह अफ़सरों को धमका रहे हैं और शिवराज सरकारी पैसों को बाँटकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। जनता के वोट से चुनी गयी सरकार (यहाँ तो ख़रीदी गयी) को चुनाव में जाने से पहले इस तेवर के लिए माफ़ नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र बचाना है तो उन्हें हटाना ही पड़ेगा। कांग्रेस लाओ देश बचाओ।’ सिंह ने जिस खबर का संदर्भ दिया, उसके अनुसार कल देर रात भारतीय जनता पार्टी की भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की बैठक में श्री शाह ने अधिकारियों के संदर्भ में कथित तौर पर चेतावनी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया। इस खबर को लेकर आज कांग्रेस के नेता भाजपा पर हमलावर हो रहे हैं।
वहीं अपनी एक और एक्स पोस्ट में सिंह ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि भाजपा की गुटबाजी इन दिनों चरम पर है जिसे ढकने के लिए वे प्रायोजित रूप से कांग्रेस नेताओं में खासकर उनके और श्री कमलनाथ के बीच की अनबन की झूठी खबर फैलाते हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का हर एक नेता भाजपा को हराने के लिए एकजुट और संकल्पबद्ध है।  साथ में वार्ता इनपुट ⁦

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