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पश्चिमी सिंहभूम : शाह ब्रदर्स लौह अयस्क खदान में  अवैध खनन एवं उठाव

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पूर्व मुख्यमंत्री ने खान एवं भूतत्व विभाग को सरकार से की शाह  ब्रदर्स की जांच कर कार्रवाई की मांग
 
शाह ब्रदर्स गलत शपथ पत्र के साथ सरकार एवं विभाग को किया गुमराह, निर्धारित मात्रा से काफी अधिक अवैध खनन कर रहा है कंपनी
 

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 पूर्व मंत्री एवं विधायक सरयू राय भी कर रहे हैं विरोध, सरयू राय के विरोध के कारण ही खान सचिव के श्रीनिवासन को हटना पड़ा

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चाईबासा :  मेसर्स शाह ब्रदर्स करमपदा लौह अयस्क खदान में अवैध खनन एवं अवैध उठाव मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार खान एवं भूतत्व विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर जांच कर कार्रवाई की मांग की है। लौह अयस्क का उठाव किया जा  राज्य सरकार के खनन एवं भू-तत्व विभाग द्वारा प. सिंहभूम जिला में मेसर्स शाह ब्रदर्स करमपदा कंपनी को लौह अयस्क खदान में पूर्व में खनन की भंडारित मात्रा 570000 है । जिसमे अब तक लगभग 1 लाख मीट्रिक टन लौह अयस्क का उठाव किया जा चुका है और अब भी उठाव जारी है. शाह ब्रदर्स करमपदा लौह अयस्क खदान मालिक एवं कम्पनी के लोग मिलकर पूर्व में खनन कर भंडारित लौह अयस्क को शर्तों को ताक पर रखकर वर्तमान में खनन कर स्टॉक कर खदान से बाहर भेजा जा रहा है. जबकि शर्तों के अनुसार खदान मालिक को केवल भंडारित लौह अयस्क का उठाव मात्रा एवं गुणवत्ता के अनुसार करने की शर्त दिया गया है. खदान से लौह अयस्क  का उठाव
भू-तत्व विभाग की देखरेख में किया जाना है. खदान मालिक द्वारा खदान के अंदर लौह अयस्क का खनन कर बाहर कैसे भेजा जा रहा है. खदान में खनन कर रखे गए लौह अयस्क और
उठाव की दी गई अनुमति में भारी अंतर है. मात्रा और गुणवत्ता को लेकर खदान मालिक ने सरकार को गलत हलफनामा देकर सरकार को गुमराह किया है. ताकि अधिक से अधिक अवैध खनन कर लौह अयस्क को बाहर भेजा जा सके और सरकारी राजस्व की चोरी की जा सके. खदान मालिक ने पूर्व सरकार को वार्षिक रिपोर्ट में भंडारित लौह अयस्क की मात्रा 370000 मीट्रिक टन दिखायी थी. इसके बाद इस मात्रा को बढ़ा कर  570000 मीट्रिक टन दिखाया गया, यह भी गंभीर मामला है। लौह अयस्क की निर्धारित मात्रा में 2 लाख मैट्रिक टन लौह अयस्क कैसे बढ़ गया।  समय पर स्थल में जा कर निरीक्षण कर रहा है. अगर नहीं कर रहा है, तो खनन विभाग द्वारा अवैध खनन को नजरअंदाज कैसे किया जा रहा ताकि ज्यादा से ज्यादा अवैध खनन किया जा सके  और खदान में अवैध खनन कर लौह अयस्क की  काला बाजारी की जा सके. गलत तरीके से खान विभाग ने लौह अयस्क उठाव की अनुमति दी है। सरकार और खान भूतत्व विभाग के प्रधान सचिव को  दिए गये हलफनामे एवं  लौह अयस्क मात्रा- गुणवत्ता में भारी गंभीर गड़बड़ी है। करमपदा लौह अयस्क खदान में शाह ब्रदर्स द्वारा अवैध खनन कैसे किया जा रहा है , खदान में खनन एवं निगरानी के बावजूद कैसे हो रही है. इससे सरकार पर भी सवालिया निशान लग  रहा  है. कोई खदान मालिक इतना बड़ा दुःसाहस कैसे कर सकता है? किसी भी खदान मालिक को अवैध खनन की इजाजत नहीं दी जा सकती है. यह केवल राजस्व की हानि नहीं है. यह सरकार के महकमा के प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाती है. पूर्व मुख्यमंत्री अपने ही सरकार के फैसले के विरोध में उतर आए हैं जिससे मामला काफी गंभीर हो गया है।  शाह ब्रदर्स को करमपदा लौह अयस्क खदान में खनन कर रखे गए लौह अयस्क उठाव एवं बिक्री की अनुमति दी थी ताकि अवैध खनन एवं लीज शर्तो का उल्लंघन आदि को लेकर न्यायालय और सरकार के निर्देश पर निर्धारित जुर्माना की राशि जमा की जा सके। इधर शाह ब्रदर्स को लौह अयस्क उठाव की अनुमति देने के विरोध में पूर्व मंत्री सह विधायक सरयू राय भी मुखर  हैं और सरकार एवं खान विभाग के इस निर्णय के विरोध में खुलकर उतर आए हैं।  सरयू राय के विरोध के कारण ही खान सचिव के श्रीनिवासन को पद से हटाया गया ।पूर्व मंत्री सरयू राय ने भी करमपदा लौह अयस्क खदान में भारी पैमाने पर लौह अयस्क का अवैध खनन चोरी तस्करी एवं गलत शपथ पत्र के आधार पर सरकार को गुमराह कर खनन विभाग के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर लौह अयस्क के उठाव की अनुमति लेने आदि को लेकर विरोध में उतर आए हैं। बता दें कि पश्चिमी सिंहभूम जिला लौह अयस्क  को लेकर देश ही नहीं पूरे दुनिया में जाना जाता है साथ ही  लौह अयस्क की चोरी तस्करी को लेकर चर्चित और बदनाम हुआ है
।जिले में लौह अयस्क की लूट घोटाला एवं भारी पैमाने पर लौह अयस्क की चोरी तस्करी हुई थी। जिसको लेकर सरकार और न्यायालय के निर्देश पर जस्टिस शाह आयोग का गठन किया गया था ।जस्टिस शाह आयोग की टीम ने पूरे खदान क्षेत्र एवं सभी खदानों का निरीक्षण किया था एवं सभी खदानों में लीज शर्तो का उल्लंघन करने, डीम्ड एक्सटेंशन के नाम पर खनन करने , खदानों में अवैध खनन, लौह अयस्क की चोरी तस्करी करने, वन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने एवं सरकारी राष्ट्रीय संपत्ति -राजस्व को नुकसान पहुंचाने आदि को लेकर सरकार  को रिपोर्ट सौंपी थी ।जिसके बाद न्यायालय द्वारा अवैध खनन करने वाले खदानों एवं संचालकों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था एवं कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। जिसके बाद से सभी खदानों को बंद कर कर कर दिया गया था और अवैध खनन करने वाले खदान संचालकों से जुर्माने की राशि वसूली जा रही थी।खदानों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था वह भी न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन कर अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर और मोटी राशि लेकर जुर्माने की राशि भी घटा दी गई यह भी काफी गंभीर और संदिग्ध मामला है जो जांच का विषय है ।
वही खदान प्रबंधन का कहना है कि सरकार और खनन विभाग के निर्देशानुसार  ही खदान से लौह अयस्क का उठाव  किया जा रहा है, कुछ भी गलत नहीं हो रहा है। सभी आरोप बेबुनियाद हैं
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