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पश्चिम सिंहभूम :  लुटेरे अधिकारियों -अभियंताओ -ठेकेदारों के लिए  चारागाह

बना जिला , लूट -खसोट , घोटाले- भ्रष्टाचार को लेकर   हो रहा है चर्चित और बदनाम

लघु सिंचाई विभाग का कारनामा, 17 करोड़ की नहर पहली बरसात में ही हुए ध्वस्त, लूट- घोटाले का हुआ भंडाफोड़

 राजनीतिक संरक्षण में सुनियोजित और प्रायोजित तरीके से जिला में होता रहा है घोटाला सभी तकनीकी विभागों में लूट भ्रष्टाचार का आलम

  सभी तकनीकी विभागों में सरकारी राशि की हुई लूट, विगत 5 वर्षों में हुए विकास योजनाओं की हुई जांच तो करोड़ों -अरबों के दर्जनों घोटालों का होगा पर्दाफाश

चाईबासा :  लूट घोटाले भ्रष्टाचार  के लिए चर्चित और बदनाम पश्चिम सिंहभूम जिला मे मानो घोटाले और घोटाले बाजों की बाढ़ आ गई है। जिला लूट भ्रष्टाचार लुटेरे और भ्रष्टाचारियो के लिए चारागाह बन गया है। बहुचर्चित चारा घोटाला, लौह अयस्क घोटाला, खाद्यान्न घोटाला ,योजना घोटाला ,प्राक्कलन घोटाला, पीएचइडी घोटाला, शौचालय और दर्जनों घोटालों का यह जिला गवाह बन  चुका है।  लुटेरे अधिकारियों- अभियंता ठेकेदारों ,बिचौलियों का चारागाह बने सभी तकनीकी विभागों में लूट भ्रष्टाचार का आलम है। करोड़ों- अरबों के  महत्वकांक्षी सड़क, पुल -पुलिया, नहर ,जलापूर्ति आदि योजनाओं में भारी पैमाने पर घोटाले हो चुके हैं और वर्तमान में भी घोटाले बदस्तूर जारी है ।कहीं राजनीतिक तो कहीं सरकारी -प्रशासनिक संरक्षण में अभियंता -ठेकेदार गठजोड़ से सभी तकनीकी विभागों के विकास योजनाओं में जमकर घोटाले और लूट हो रही हैं।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ,लघु सिंचाई विभाग, एनआरईपी ,विशेष प्रमंडल ,झालको आरईओ ,भवन निर्माण ,पथ निर्माण आदि तकनीकी विभागों में अभियंता- ठेकेदार गठजोड़ से राजनीतिक और राज नितिक बिचौलियों के संरक्षण में घोटाले पर घोटाले हो रहे है। इन सभी विभागों के पिछले 5 वर्षों के कार्यकाल और सभी योजनाओं की जांच हो तो सुनियोजित और प्रायोजित तरीके से करोड़ों अरबों के घोटाले का पर्दाफाश होगा । पीएचईडी विभाग में अभियंता- ठेकेदार गठजोड  से जलापूर्ति योजनाओ, शौचालय  आदि  सरकारी की महत्वकांक्षी योजनाओं में  हुए करोड़ों के घोटाले बतौर साक्ष्य और सबूत है।

पश्चिमी सिंहभूम जिला में लूट का आलम यह है कि करोड़ों के नहर की योजना बरसात की पहली बारिश भी नहीं जेल पाती लाखों का पुलिया पानी में धराशाई हो जाता है एक नया मामला लूट और घोटालों के लिए चर्चित बदनाम लघु सिंचाई विभाग मे 17 करोड़ और की नहर पहली ही बारिश में बह गई है नहर में दर्जनों स्थानों पर नहर  पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।

जल संसाधन विभाग से करोड़ो की लागत में बनाई जा रही नहर  अधिकारीयों और ठेकेदारों  के  लूट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़  गई । नहर का निर्माण इतना घटिया हुआ है कि बारिश का पानी नहर में बहते ही पुरा नहर ध्वस्त हो गया। इसके साथ ही नहर निर्माण में बरती गई अनियमितता का भंडा फोड़ हो गया । पिछले दिनों  हुई भारी बारिस के कारण जिले के हाटगम्हरिया प्रखंड अंतर्गत कुशमुंडा नदी में स्थित बांध का जलस्तर बढ़ गया। पानी बांध से निकलकर नहर में बहने लगा, इसी पानी के बहाव से कुशमुंडा से खैरपाल वाली नहर ध्वस्त हो गई है। जगह-जगह नहर का कांक्रीट पानी में बहकर अलग हो गया है। यही स्थिति  नहर निर्माण किऐ गऐ 15 किलोमीटर में कई जगह बनी हुई है। 17 करोड़ के नहर के ध्वस्त होने की जानकारी मिलने पर नाहर को देखने पहुंचे पूर्व मंत्री और क्षेत्र के पूर्व विधायक रहे बडकुवर गागराई, सांसद प्रतिनिधी जयप्रकास लागुरी एव समाजसेवी पुरेन्द्र हेम्ब्रम ने कहा की ठेकेदार बड़े नेताओं के संरक्षण में रहते हैं। इसलिए  क्षेत्र में गलती करने से नहीं डरते हैं। कुशमुंडा से खैरपाल वाली नहर में नेताओं के साथ सरकारी पदाधिकारीयों का भी संलिप्ता है। इसलिए ठेकेदार ने बहुत ही घटीया तरीके से नहर को निर्माण किया है । चंद पैसों की लालच में पदाधिकारी व नेताओं ने किसानों की सिचाई व्यवस्था पर डाका डाला है।

जल संसाधन विभाग से बन रही यह योजना वर्ष 2020 में शुरु की गई है। लगभग 17 करोड़ की लागत से बन रही यह नहर योजना पांच माह पहले ही कंक्रीट किया गया था। 15 किलोमीटर की लम्बी यह नहर मझगांव व हाटगम्हरिया प्रखंड के 15 गांव के लोगों को सींचाई व्यवस्था उपलब्ध करवाऐगी। इसमें कुशमुंडा, बड़मीता, बाईसाई, जरकादोड़ा, कोटाचरा, तिरिलपी, बारुसाई, रायीकासाई, मारीयासाई, बालियापोसी होते हुऐ खैरपाल, रुगुसाई, जगदासाई शामिल है। नहर निर्माण में ठेकेदार ने बाहर किनारे में चार ईंच का कंक्रीट ढलाई किया हुआ है। इसे देखकर प्रतीत होगा की पुरी नहर चार ईंच का ढलाई है। मगर 2 दिन पहले हुई बारिष  ने नहर निर्माण कार्य में हुए लूट और घोटाले  भ्रष्टाचार का सारा पोल खोल दिया है। नहर का कंक्रीट धंसने से अंदर में में हुई ढलाई दिखने लगी। ठेकेदार ने लीपा-पोती कर मिट्टी के परत को ढकने मात्र ही पतली परत में कंक्रीट किया है। इस कारण से नहर में पहला पानी के बहाव से कंक्रिट धस गया है। किसानों ने कहा की दो दिन पहले हुई बारिस सही समय पर हुई है। बारिष के कारण ही ठेकेदार व अभियंता के काम की हकीकत सामने आ गई है।  अनन-फानन में लीपा-पोती कर बरसात से पहले काम खत्म कर भागने की योजना बनाऐ थे। लेकिन इससे पहले ही दर्जनों गांव में किसानों के लिए सिंचाई की सुविधा पहुंचाने के लिए करोड़ों के महत्वकांक्षी नहर परियोजना में लूट भ्रष्टाचार की पोल खुल गई। नहर निर्माण में हुए लूट घोटाले में दोषी अभियंताओं- ठेकेदार पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

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