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सनसनी नहीं, सटीक खबर

पश्चिमी सिंहभूम: जिले की सभी लौह अयस्क खदानें हुई बंद

खनन विभाग के एक अजीबोगरीब निर्देश के बाद खदान और खनन क्षेत्रों में एक बार फिर बढ़ सकती है लौह अयस्क का अवैध खनन, चोरी- तस्करी

जिन खदानों और खदान संचालकों ने की अवैध खनन ,
लौह अयस्को की चोरी -तस्करी, खनन की आड़ में कांटे पेड ,

पहुंचाया वन पर्यावरण को नुकसान ,उन्हीं को मिला नीलामी तक खदानों के देखभाल जिम्मा

बिल्ली को दूध की रखवाली” वाली कहावत हो रही है चरितार्थ

बड़ाजामदा के बहुचर्चित खदान और एक चर्चित खदान मालिक
लौह अयस्को के अवैध खनन का मास्टरमाइंड और खदान क्षेत्रों में अवैध खनन तस्करी का किंगपिन

लौह अयस्क के अवैध खनन, चोरी- तस्करी , हजारों करोड़ के घोटाले को लेकर पूरे देश में चर्चित और बदनाम हुआ पश्चिमी सिंहभूम जिला

खनन की जांच के लिए बनी जस्टिस शाह आयोग की रिपोर्ट पर खदान संचालकों पर भारी पैमाने पर खदानों में अवैध खनन , लौह अयस्को की चोरी तस्करी वन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को लेकर लगाया गया था भारी-भरकम जुर्माना

 राजीव सिंह ,बुलबुल 

चाईबासा: लौह अयस्क की अवैध तस्करी ,अवैध खनन और हजारों करोड़ के लौह अयस्क घोटालों को लेकर चर्चित और बदनाम एवं देश – दूनिया में चर्चा में आए झारखंड और पश्चिमी सिंहभूम जिला में लौह अयस्कों का अवैध खनन तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रहा है सरकार और खान खान मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले के टाटा -सेल को छोड़कर सभी 26 निजी लौह अयस्क खदाने 31 मार्च से बंद हो गई हैं। जिसमें लीज शर्तों का उल्लंघन करने और भारी पैमाने पर लौह अयस्को का अवैध खनन करने, खनन की आड़ में पेड़ों की कटाई करने , वन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने ,प्रदूषण फैलाने , सरकारी और राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने ,लौह अयस्को की चोरी तस्करी करने वाले कई चर्चित खदानें ने भी शामिल है ।लेकिन विभागीय अजीबोगरीब निर्देशों के बाद अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई है। सरकार के निर्देशानुसार 31 मार्च 2020 को जिले के सभी लौह अयस्क खदानों की लीज अवधि समाप्त हो गई है और सभी खदानों को बंद करने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के अनुसार अब उन्ही खदान संचालकों द्वारा खदानों में खनन कर जमा कर रखे गए लौह अयस्को को बेचने के लिए 6 माह तक का समय दिया गया है।
लौह अयस्क खदानों की नीलामी होने तक तक खदान संचालकों को खदानों से खनन कर निकाले गए लौह लौह अयस्को को बेचने की अनुमति के साथ ही लौह अयस्क खदानों के देखभाल एवं रखरखाव का भी जिम्मा दिया गया है। जबकि सरकार और विभाग को खदान संचालकों को एक माह के अंदर अपने-अपने खदानों में खनन कर जमा कररखे गए लौह अयस्को को खदानों से हटाने और उन सभी खदानों को कब्जे में ले लेना चाहिए। लेकिन विभाग के अजीबोगरीब निर्देश के बाद बिल्ली को दूध की रखवाली वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। जिले के बड़ा जामदा नोवामुंडी खदान क्षेत्रों में स्थित खदानों में खदान संचालकों द्वारा अपने लीज के खदान क्षेत्रों के साथ ही लीज एरिया से बाहर जाकर भी अवैध खनन औरलौह अयस्को की चोरी ,तस्करी एवं खनन की आड़ में हजारों पेड़ों को काटने और प्रदूषण फैलाने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज है और उन खदान संचालकों को भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया था। कई कंपनियों ने तो सरकार के आदेश को दरकिनार कर और अवैध खनन ,लौह अयस्को की तस्करी वन एवं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने प्रदूषण फैलाने को लेकर लगाए गए जुर्माने की राशि जमा करने से भी इंकार कर दिया। नोवामुंडी वाला जामदा खदान क्षेत्रों में खदान संचालकों द्वारा भारी पैमाने परलौह अयस्को का अवैध खनन चोरी तस्करी की गई। वन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया गया। खनन की आड़ में पेड़ों की कटाई की गई जिसके कारण अवैध खनन चोरी और तस्करी की जांच के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित जस्टिस शाह आयोग द्वारा जिले के सभी खदानों की जांच की गई थी जिसमें भारी पैमाने पर लोगों की चोरी तस्करी और वन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पेड़ों की कटाई करने का मामला सामने आया था और सभी खदान संचालकों में भारी पैमाने पर अवैध गड़बड़ी करने और राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सरकार के राजस्व की चोरी करने आदि का मामला सामने आया था और खदान संचालकों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था। अब जब 31 मार्च 2020 को नए एक्ट और कानून लागू होने के बाद सभी लौह अयस्कखदानों को बंद करा दिया गया है, और बंद खदानों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो गई है वहीं विभागीय एक अजीबोगरीब आदेश के बाद खदान संचालकों को फिर से 6 माह तक अवैध खनन और लौह अयस्को की चोरी तस्करी करने का मार्ग खोल दिया है। उन खदान संचालकों को 6 माह तक अपने खदानों में खनन कर रखे गए लौह अयस्को को बिक्री बेचने की अनुमति दी गई है, साथ ही खदानों को रखरखाव की भी जिम्मेवारी सौंपी गई है। जबकि खदान संचालकों द्वारा पूर्व से ही सरकार के आदेशों और और खनन नियमावली को ताक पर रख कर लौह अयस्क का अवैध खनन ,चोरी तस्करी की गई पेड़ों की कटाई की गई । वन- पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया गया । खदान क्षेत्रों के साथ ही सुरक्षित वन क्षेत्रों में भी लौह अयस्क का अवैध खनन भारी पैमाने पर किया गया औरलौह अयस्क की चोरी तस्करी कराई गई। अब फिर से उन्ही खदान संचालकों को राष्ट्रीय संपत्ति और राष्ट्रीय संपदा, वन पर्यावरण लौह अयस्क खदानों को बचाने और रखरखाव का जिम्मा दिया गया है यह तो वही कहावत हो गई कि बिल्ली को दूध की रखवाली दे दी गई। विभागीय स्तर पर खदान संचालकों और अवैध खनन माफियाओं के साथ अलीबाबा चालीस चोर के तर्ज पर राम नाम “लौह अयस्क” की लूट मची है लूट सको तो लूट लो वाली कहावत भी चरितार्थ हो रही है। खदान संचालकों को भी यह पता है कि वर्षों से और पीढ़ी दर पीढ़ी जिन खदानों पर उनका कब्जा था और दिन खदानों से लौह अयस्क को निकालकर और कारोबार कर अकूत संपत्ति अर्जित की ,वह खदान उनके हाथ से निकलने वाला है ,क्योंकि जब खदानों की ऑनलाइन और खुले पैमाने पर नीलामी होगी तो बड़ी-बड़ी कंपनियों का इन खदानों पर कब्जा हो जाएगा इस स्थिति में एक बार फिर खदान क्षेत्रों और सुरक्षित वन क्षेत्रों में भारी पैमाने पर लौह अयस्क का अवैध खनन, चोरी और तस्करी होगा। वन पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। अवैध खनन की आड़ में पेड़ों की कटाई होगी और भारी पैमाने पर लौह अयस्क का घोटाला होगा। बताया जाता है कि बड़ा जामदा का एक बहुचर्चित खदान में अब भी खनन कार्य जारी है और सरकार एवं खनन विभाग के आदेश को धता बताकर अवैध खनन किया जा रहा है साथ ही अवैध खनन कर निकाले गए लोगों की बिक्री की जा रही है उक्त खदान का संचालक ही अवैध खनन का खदान क्षेत्रों में मास्टरमाइंड और किंगपिन माना जाता है। इसके साथ ही दर्जनभर खदान संचालक और खनन माफिया एक बार फिर खदानों एवं सुरक्षित खदान क्षेत्रों में लौह अयस्क की चोरी- तस्करी और अवैध खनन “लाल आतंक ” के लिए सक्रिय हो गए है। अवैध खनन खनन का निकाले गए लौह अयस्क की चोरी तस्करी कर बड़ाजामदा और आसपास के स्थित स्टील और स्पंज प्लांटों के साथ ही जमशेदपुर ,चांडिल,रामगढ़ , पुरुलिया ,बलरामपुर, बंगाल आदि तक फर्जी चलाना एवं सेटिंग सेटिंग कर बरे बरे ट्रकों पर लादकर खनन माफियाओं द्वारा पहुंचाया जाता है।।

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