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कट्टरपंथ से आगाह करते बोले भागवत, देश की अखंडता,विकास को ध्यान में रख डालें वोट

संघ प्रमुख ने नागपुर में शस्त्र पूजन के बाद दशहरा रैली को किया संबोधित

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दिल्ली डेस्क

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देश को कट्टरपंथियों और अलगाववादियों से सावधान रहने की नसीहत दी है. उन्होने कहा है कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब हम दुनिया के महत्वपूर्ण देशों में शामिल हैं, परन्तु कुछ ताकतें हैं जो देश की प्रगति को रोकना चाहती है. मोहन भागवत ने कहा कि ये ताकतें हमेंशा इस कोशिश में लगी रहती है कि कैसे टकराव और अलगाव पैदा हो. इन ताकतों को विफल करने का आह्वान करते हुए उन्होने कहा कि हमें अपना रास्ता बनाना है और दुनिया को एक यशस्वी प्रयोग देना है. इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध की ओर इशारा करते हुए संघ प्रमुख ने इसके लिए कट्टरपंथी सोच को जिम्मेदार ठहराया. उन्होने कहा कि कट्टरपन के चलते उन्माद पैदा होता है और युद्ध होते हैं.

चुनाव का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने देश के लोगों से कहा कि वो देश की पहचान, अखंडता और विकास को ध्यान में रखते हुए वोट डालें. संघ प्रमुख ने दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने भी हमारे देश की विविधता में एकता को महसूस किया.

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नागपुर में दशहरा के मौके पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत का उदेश्य हमेंशा विश्व का कल्याण रहा है परन्तु स्वार्थी और अलगाववादी ताकतें ऐसा नहीं चाहती . इसलिए वो अपने सांप्रदायिक हितों को साधने के लिए समाजिक एकता को बाधित करने की कोशिशों में जुटी हैं. ऐसी ताकतें तरह-तरह के लबादे पहनती हैं. सांस्कृतिक मार्क्सवादी अराजकता और अविवेक को पुरस्कृत करते हैं और उसे बढ़ावा देते हैं. उनकी कार्यप्रणाली में मीडिया और शिक्षा जगत पर नियंत्रण करना और सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण को भ्रम, अराजकता और भ्रष्टाचार में डुबाना शामिल है.

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संघ प्रंमुख ने राम मंदिर और मणिपुर के हालात पर भी खुलकर अपने विचार रखे. मणिपुर का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि करीब एक दशक से राज्य शांत था फिर अचानक से हिंसा कैसे भड़क उठी. किसने मैतेई और कूकी समाज में अलगाव और नफरत को हवा दी. दोनों समाजों के आपसी संघर्ष को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई और इसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को घसीटने की कोशिश की गई. उन्होने चीन की तरफ इसारा करते हुए कहा है कि मणिपुर में माहौल खराब कर लाभ लेने में विदेशी सत्ताओं को रूचि हो सकती है. मोहन भागवत ने पूछा कि देश में मजबूत सरकार के होते हुए भी किसके बूते हिंसा होती रही. अब जबकि शांति की कोशिशें लगातार जारी है और दोनों पक्ष शांति चाह रहे हैं फिर भी बीच-बीच कोई हादसा करवा कर अलगाव और हिंसा फैलाने की कोशिश करने वाली ताकतें कौन सी है ? उन्होने कहा कि संघ के उन कार्यकर्ताओं पर गर्व है जिन्होने मणिपुर में शांति बहाली के लिए काम किया.

राम मंदिर पर मोहन भागवत ने कहा भागवान श्रीराम मंदिर में प्रवेश करने वाले हैं. भव्य मंदिर बन रहा है. उद्घाटन के लिए सभी लोगों का वहां पहुंच पाना संभव नहीं हो पाएगा इसलिए जो जहां पर हैं वहीं के राम मंदिर में आयोजन करें. उन्होने कहा कि यह लोगों के दिलों में राम को जगायेगा और आपसी स्नेह बढ़ायेगा.

विजयादशमी के दिन ही 1925 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की गई है. तबसे विजयादशमी को संघ अपना स्थापना दिवस मनाता है. इस दिन शस्त्र पूजा की जाती है इसके बाद पथ संचरण होता है और संघ प्रमुख संवयंसेवकों को संबोधित करते हैं. हर बार शस्त्रपूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर संगीतकार-गायक शंकर महादेवन को हुलाया गया था. इस मौके पर उन्होने कहा कि देश की संस्कृति को बचाए रखने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का बड़ा योगदान है. संघ के साथापना दिवस कार्यक्रम में हर साल किसी न किसी मशहूर हस्ती को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया जाता है.

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