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22 सितंबर से लेकर 15 दिसंबर तक राज्य के 150 पंचायतों में चला ग्रामीणों की आस, मनरेगा से विकास अभियान

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36245 परिवारों को दिया गया 100 दिनों का काम, 1.50 लाख योजनाओं को पूरा करने का दावा

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रांची : झारखंड सरकार ने 22 सितंबर 2021 से लेकर 15 दिसंबर 2021 तक 100 दिनों के लिए “ग्रामीणों की आस, मनरेगा से विकास” अभियान चलाया। राज्य के 150 प्रखंडों में चलाये गये 100 दिनों का रोजगार अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के 36245 परिवारों को काम दिया गया। यानी 75.4%  परिवारों को रोजगार दिया गया. अभियान के दौरान कुल 1.50 लाख योजनाओं को पूरा किया गया।  इसके साथ ही पूर्व से चली आ रही 43366 योजनाओं को भी समाप्त किया गया। सरकार के इस अभियान में प्रति परिवार 32.29 से बढ़कर 37. 21 फीसदी मानव दिवस दी गयी. अभियान का उद्देश्य, नियमित रोजगार दिवस एवं ग्राम सभा का आयोजन करने के साथ-साथ सभी परिवारों को ससमय रोजगार उपलब्ध कराना था। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की महिला श्रमिकों की भागीदारी में वृद्धि करते हुए प्रति परिवार औसतन मानव दिवस में वृद्धि करने, परिवारों को मनरेगा का जॉबकार्ड जारी करने और उसके नवीकरण, जॉबकार्ड का सत्यापन करना भी एक लक्ष्य तय किया गया था। प्रत्येक गांवों, टोलों में हर समय औसतन 5-6 योजनाओं का क्रियान्वयन करने के अलावा पूर्व से चली आ रही पुरानी योजनाओं को पूरा करने का कार्यक्रम भी सरकार ने तय किया था। शत-प्रतिशत महिला मेट का नियोजन, NMMS के माध्यम से मेट के द्वारा मजदूरों की उपस्थिति अपलोड करना, जीआइएस आधारित प्लानिंग और सामाजिक अंकेक्षण के दौरान पाये गए मामलों के निष्पादन तथा राशि की वसूली अभियान के तहत सुनिश्चित किये गए।

अभियान के दौरान जीआईएस बेस्ड प्लानिंग के तहत कुल 3031 ग्राम पंचायतों की योजना तैयार की गयी। इस लक्ष्य के विरुद्ध 29 सौ ग्राम पंचायतों के प्लान को संबंधित जिलों के अधिकारियों ने अनुमोदित किया। वनाधिकार पट्टा के कुल 22 हजार 309 परिवारों को जॉबकार्ड उपलब्ध कराते हुए 5432 परिवारों को मनरेगा से लाभ दी गयी। अभियान के दौरान 3.24 करोड़ मानव दिवस का सृजन किया गया है, जो कुल सृजित मानव दिवस का 36% है। इसमें महिलाओं की भागीदारी 1.54 लाख मानव दिवस में देखी गयी, जो अभियान के दौरान सृजित मानव दिवस का 48% है. योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी 1.20% बढ़ी. अभियान के तहत अनुसूचित जनजाति कोटि के श्रमिकों द्वारा कुल 78.83 लाख मानव दिवस सृजित किया गया, जो कुल सृजित मानव दिवस का 24.35% है। अनुसूचित जाति कोटि के श्रमिकों द्वारा कुल 31.78 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया, जो कुल सृजित मानव दिवस का 9.82% है।

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