Live 7 Bharat
जनता की आवाज

उत्तराखंड: जल्द खत्म होगा इंतजार, कुछ देर में सुरंग से बाहर निकलेंगे मजदूर

पीएम मोदी ने घटना पर बना रखी थी पल-पल की नजर

- Sponsored -

उत्तराखंड के उत्तरकाशी टनल की सुरंग में पिछले 16 दिन से फंसे मजदूरों को अब 800 मिमी व्यास का पाइप के रास्ते एक-एक कर के बाहर निकालने की तैयारी पूरी कर ली गई है। किसी भी वक्त मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है। मजदूरों के स्वास्थ्य चेकअप के लिए मौके पर डॉक्टरों की टीम और एंबुलेंस को भी तैनात किया गया है। इसके अलावा उत्तरकाशी के चिनियालीसौड़ कस्बे में चिनूक हेलिकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं. इमरजेंसी स्थिति में इसके जरिए मजदूरों को अस्पताल के लिए एयरलिफ्ट किया जायेगा।

 

- Sponsored -

हादसे के बाद से सुरंग के अंदर और बाहर अब तक क्या क्या हुआ?

 

12 नवंबर की सुबह उत्तरकाशी के सिलक्यारा स्थित टनल में दुर्घटना हुई. लैंड स्लाइड के बाद मलबा से सुरंग जाम हो गया और 41 कामगार उसमें फंस गए. इसके बाद से उन्हे बाहर निकालने के लिए सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी ऑगर मशीन की मदद से सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए खुदाई का काम शुरू किया। उस दौरान सबको लगता था कि बहुत जल्द मजदूर सुरंग से बाहर आ जायेंगे लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता गया परेशानियों का पहाड़ भी सामने आता गया। लेकिन वो कहते है ना कि कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती। सरकार ने मजदूरो को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। NDRF, SDRF समेत 7 एजेंसियों की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई। कई बार लगा की बस अब से कुछ ही घंटे में ऑपरेशन पूरा कर लिया जाएगा लेकिन ऐसा नही हो सका। एक के बाद एक कई बाधाएं आई जिससे बार बार बचाव अभियान को रोकना पड़ा। 24 नवंबर की शाम को लगा की अगली सुबह मजदूर सुरंग से सकुशल बाहर आ जायेंगे। लेकिन कहते है कि समय से पहले ना कुछ हुआ ना होगा। देर रात ऑगर मशीन मलबे में फंसकर फिर खराब हो गई। जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन को फिर रोकना पड़ा। अगले पूरे दिन ऑपरेशन रूका रहा। उस दौरान बचाव दल ने मजदूरों को बाहर निकालने के लिए अन्य विकल्पों की तलाश शुरू की। बैठक के दौरान मैनुअल और वर्टीकल ड्रीलिंग के जरिए रास्ता बनाकर मजदूरों को बाहर निकालने का फैसला किया । सोमवार से रेट माइनर्स ने सुरंग में मैनुअल खुदाई की शुरूआत की और आखिरकार इंतजार की घड़िया अब बहुत जल्द खत्म होने वाली है। 800 मिमी व्यास का पाइप के रास्ते एक एक कर के सभी 41 मजदूरों सुरंग से बाहर निकालने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

 

पीएम मोदी ने घटना पर बना रखी थी पल-पल की नजर

 

टनल के धंसने के बाद 16 दिन तक रात-दिन 24 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। हालांकि बीच-बीच में मशीन के खराब होने के चलते काम को रोकना पड रहा था। हादसे के बाद से पीएम मोदी ने रेस्क्यू ऑपरेशन पर अपनी नजर बना रखी है। इसके साथ ही पीएम मोदी लगातार मामले को लेकर उत्तराखंड सीएम धामी से फोन पर संपर्क कर रहे थे।

 

टनल के बनने से उत्तरकाशी से यमुनोत्री के बीच 26 किलोमीटर की दूरी होगी कम

 

सिलक्यारा सुरंग केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चारधाम परियोजना का हिस्सा है. सुरंग का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के तहत किया जा रहा है. टनल ​​​​ब्रह्मखाल और यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर सिल्क्यारा और डंडलगांव के बीच बन रहा है।

इसकी लंबाई करीब साढ़े चार किलोमीटर होगी। टनल के बन जाने के बाद उत्तरकाशी से यमुनोत्री की दूरी करीब 26 किलोमीटर कम हो जाएगी। टनल की लागत लगभग 850 करोड़ है और मार्च 2024 तक इसका काम पूरा करने का टारगेट है। 12 नवंबर की सुबह लगभग 5 बजे टनल एकाएक धंस गई थी। जिसमें काम कर रहे बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मजदूर फंस गए थे।

Looks like you have blocked notifications!

- Sponsored -

- Sponsored -

Comments are closed.

Breaking News: