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अप्राकृतिक संबंध बनाने वाले की जमानत अर्जी खारिज

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सात साल के मासूम से अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करने वाले आरोपी को राहत नहीं देते हुए सोमवार को उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने इसे जघन्य अपराध करार दिया है।

घटना लगभग ढाई साल पहले की है। आरोप है कि उधमंिसह नगर के बाजपुर निवासी सुभाष 17 फरवरी, 2019 को सात साल के मासूम को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ अप्राकृतिक संबंध स्थापित किये। इस घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। मासूम के घरवालों को जब पता चला तो आरोप के खिलाफ बाजपुर में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) की धारा 6 के तहत अभियोग पंजीकृत कराया गया।

पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को जेल भेज दिया। आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी दो साल से न्यायिक हिरासत में है। आरोपी 18 साल का है और उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। मामले की जांच भी पूरी हो गयी है। इसलिये गवाहों और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना भी नहीं है। इसलिये आरोपी जमानत पाने का हकदार है।

मामले की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की अदालत में हुई लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हुई है। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी की जमानत का विरोध किया गया और कहा गया कि उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य व सुबूत मौजूद हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने इसे जघन्य अपराध करार दिया और कहा कि आरोपी जमानत पाने का हकदार नहीं है। इसलिये जमानत अर्जी को खारिज किया जाता है।

 

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