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टूलकिट : महाआपदा के वीभत्स दुरुपयोग का अपराध

अवधेश कुमार
देश में कोरोना के कहर के कारण मचे हाहाकार और भयावह दृश्यों को कोई नकार नहीं सकता। किंतु जिस तरह की दहशत और दुनिया में कोरोना के समक्ष भारत की विफल राष्टÑ की जैसी ह्रयदयविदारक तस्वीरें लगातार पेश की जाती रहीं, उनसे करोड़ों लोग विस्मित थे। अब पता चल रहा है कि देश और विदेश की अनेक शक्तियां इस महाआपदा को भारत में हाहाकार और विदेशों में दुष्प्रचार के लिए जितना संभव हुआ उपयोग करतीं रहीं। टूलकिट दुष्प्रचार सामग्रियों के लिए सबसे बड़ा स्रोत होकर अभियान का एक प्रमुख अंग बन गया था। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी द्वंद्व को कुछ समय के लिए छोड़ दीजिए। टूलकिट का निरीक्षण करने के बाद साफ होता है कि इसके माध्यम से कोरोना आपदा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मोदी सरकार, भारत, महाकुंभ जैसे हिंदुत्व के सांस्कृतिक आयोजनों आदि की विकृत छवि बनाने का षड्यंत्र रचा गया और कुछ समय तक इसके सूत्रधार सफल भी रहे। कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज करा दी है जिसमें आरोप लगाया गया है कि टूलकिट भाजपा की साजिश है। टूलकिट पर काम करने वालों का मानना है कि यूपीए सरकार के दौरान शशि थरूर जैसे नेताओं ने राजनीति में इसके उपयोग की शुरुआत की। उसके बाद इंडिया अगेंस्ट करप्शन, अन्ना अभियान में इसका व्यापक उपयोग हुआ तथा टूलकिट ने आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने में प्रमुख भूमिका निभाई। तो यह सबके लिए हथियार बन गया। भारत में केंद्र से लेकर राज्य सरकारें, राजनीतिक पाटिर्यां और नेताओं तक की आज अपनी सोशल मीडिया टीम है। क्षमता के अनुसार इन पर खर्च किया जाता है। पाटिर्यां करोड़ों खर्च करतीं हैं। आईटी सेल के नाम से प्रचारित ये टीमें 24 घंटे सक्रिय रहतीं हैं। ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, टेलीग्राम आदि पर ये टीमें अपने अनुसार सामग्रियां झोंकते रहती हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव में हमने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया और टूलकिट का राजनीतिक युद्ध देखा। आवश्यक नहीं कि कांग्रेस पार्टी टूल किट बनाने का औपचारिक निर्देश दे। कांग्रेस की इस समय जो दशा है उसमें स्वयं नेता या कुछ नेताओं के समूह अपने स्तर पर ही राजनीतिक निर्णय ले रहे हैं। इसके पीछे जो भी हो, मानवीय विनाश वाली महाआपदा को कैसे हथियार बनाकर राजनीति की जा सकती है, इसका सबसे नीच उदाहरण टूलकिट के प्रायोजकों ने पेश किया है। दुर्भाग्य से सोशल मीडिया पर तो टूलकिट के माध्यम से फैलाया जा रहा झूठ व्यापक रूप से प्रसारित हो ही रहा था, मुख्यधारा के कुछ मीडिया ने उसी झूठ को आगे बढ़ाया। विदेशी अखबारों में भारत के श्मशानों में जलती चिताओं की ऐसी तस्वीरें छापी गईं और उन पर टिप्पणियां ऐसे लिखी गई मानो भारत में कोरोना के कारण केवल मौतें ही हो रही हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पृष्ठ पर राजधानी दिल्ली में श्मशान घाट में जलती चिताओं की बड़ी तस्वीरें और रिपोर्टें जिस ढंग से भारत में सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में चलती रही, अब उसका स्रोत समझ में आ रहा है। लांसेट जैसी विज्ञान की पत्रिका की चीनी मूल की एशिया संपादक ने राजनीतिक लेख लिखकर मोदी के लिए अक्षम्य अपराध तक की बात कही और उसके वेबसाइट पर आते-आते भारत में न केवल सोशल मीडिया बल्कि मुख्यधारा की मीडिया की वेबसाइटों पर उसके अंश नजर आने लगे।
ऐसे-ऐसे मनगढंत तथ्य टूलकिट के माध्यम से दिए गए जिनसे साबित होता था कि मोदी सरकार अपनी फासीवादी नीतियों के अंधेपन में धर्म के नाम पर महाकुंभ का आयोजन होने दे रही है और यह भारत में कोरोना के प्रसार का सबसे बड़ा कारण है। यह भी कि प्रधानमंत्री मोदी चाइनीज वायरस को फैलाने के एकमात्र खलनायक तथा विफलता के नायक हैं, न वो ठीक से उपचार का प्रबंधन कर रहे हैं और न बचाव का। विधानसभा चुनावों को लेकर ऐसी छवि बनाई गई जैसे केवल भाजपा चुनाव अभियान चला रही है और कोरोना इसी कारण बढ़ रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से उसे विश्व के अनेक देशों व वैश्विक संस्थाओं को भेजा जाता रहा। इन सबसे यह निष्कर्ष तो निकलता है कि गहन योजना द्वारा पूरा चक्र बनाया गया जिसमें अलग-अलग समूहों की भूमिका तय रही होगी, अन्यथा इतने व्यवस्थित और आक्रामक तरीके से देश को बदनाम कैसे किया जाता? भारत की अंतरराष्टÑीय साख और विश्वसनीयता के कारण दुनियाभर के देशों ने जिस तरह बिना मांगे सहायता देनी आरंभ की, उसे भी बाधित करने की कोशिश की गई। कहा गया कि बाहर से आने वाले सामान उपयुक्त पात्रों तक पहुंच नहीं रहे हैं, उनके वितरण का प्रबंधन नहीं है। दुनियाभर की कई संस्थाओं ने भारत को लेकर जैसी नकारात्मक रिपोर्टें दीं, उनका स्रोत कौन हो सकता है यह भी अब समझ में आ रहा है। कोई संस्था कह रही है कि भारत में लोगों के संक्रमित होने और मौत के आंकड़े झूठे हैं। वास्तविक आंकड़े कई गुना ज्यादा हैं। कोई कह रहा है कि कोरोना की दृष्टि से भारत सबसे असुरक्षित देश है। यह टूलकिट बंद हो चुकी है, लेकिन इसके फैलाए गए जहर का प्रभाव कायम है। भारत में 18 मई को कोरोना से हुई 4529 मौत को न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे अखबार ने विश्व में एक दिन में सर्वाधिक मौत बता दिया। छानबीन करने पर तथ्य यह आया कि अमेरिका में ही 12 फरवरी को एक दिन में 5463 लोगों की मौत हुई। दुष्प्रचार में जो सच नहीं है, उन्हें सच बनाकर प्रसारित किया गया है। विश्व में कोरोना के 16.50 करोड़ से ज्यादा मामलों में सबसे अधिक 3 करोड़ 80 लाख मामले केवल 33 करोड़ आबादी वाले अमेरिका के हैं। मरने वाले सबसे ज्यादा 6 लाख वहीं के हैं। ब्राजील में मृतकों की संख्या चार लाख पार गई है। तो भारत कैसे सबसे असुरक्षित हो गया? इसी तरह कुछ और सच देखिए। प्रचारित होता रहा कि मोदी सरकार ने कोरोना को खत्म मानकर राज्यों को न आगाह किया, ना उनके साथ संवाद बनया। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में जो शपथ पत्र दिया है उसके अनुसार 7 फरवरी से 28 फरवरी के बीच कोरोना को लेकर राज्यों से केन्द्र का 17 बार संवाद हुआ था। सितंबर 2020 से अप्रैल 2021 तक प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के साथ कई बैठकें की और कोरोना के प्रति सतर्क किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनवरी से मार्च तक दो दर्जन बार राज्यों को आगाह किया, सलाह दी और केंद्रीय टीम भी भेजी गई। चुनावी राज्यों में केरल में जनवरी से प्रतिदिन लगभग 5000 मामले सामने आ रहे थे और सभी पाटिर्यां वहां चुनाव प्रचार करती रहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने 17 मार्च को मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी। इसमें उनके भाषण का एक अंश यह था कि देश के 70 जिलों में पिछले कुछ दिनों में कोरोना की वृद्धि 150 प्रतिशत से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा था कि दूसरी लहर को तुरंत रोकना होगा वरना यह देशव्यापी आउटब्रेक बन सकती है। महाकुंभ के बारे में टूलकिट ने दुनिया को नहीं बताया कि यह आध्यात्मिक-सांस्कृतिक आयोजन है जो हर 12 वर्ष पर आता है और जिसमें सरकारें दखल नहीं देतीं, केवल आवश्यकताओं का प्रबंधन करती हैं। कोरोना मामले बढ़ने के साथ प्रधानमंत्री की अपील के बाद साधु-संतों और अखाड़ों ने महाकुंभ खत्म कर दिया। जिन राज्यों में कोरोना के प्रकोप सबसे ज्यादा हुए वहां से महाकुंभ में आने वालों की संख्या अत्यंत ही कम थी। कृषि कानूनों के विरुद्ध जारी आंदोलन को हिंसक बनाने में टूलकिट की भूमिका देश देख चुका था। अब इस टूलकिट ने कराहती मानवता के बीच अपराध किया है। टूलकिट का दुरुपयोग हम सबके लिए चेतावनी होनी चाहिए। विचार करना होगा कि भविष्य में केवल टूलकिट नहीं, पूरे सोशल मीडिया में ऐसे दुरुपयोगों को किस तरह रोका जाए? आज मोदी सरकार है कल कोई और सरकार होगी और अभियान उसके विरुद्ध भी चल सकता है। किसी संवैधानिक संस्था के विरुद्ध ऐसे अभियान चलाए जा सकते हैं।

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