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उच्चतम न्यायालय ने खारिज की केरल के आध्यात्मिक गुरु की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने केरल के एक आध्यात्मिक गुरु को अपनी 21 वर्षीया शिष्या की कस्टडी लेने संबंधी याचिका में हस्तक्षेप करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पॉप स्टार ब्रिटनी स्पीयर्स के मामले का भी जिक्र किया।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में अजीबोगरीब तथ्यों के मद्देनजर वह हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है। न्यायालय ने कहा कि खुद की संतुष्टि के लिए वह जिला जज से मामले की जांच कराने का अनुरोध केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से करता है। न्यायमूर्ति रमन ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता दो बच्चों के पिता हैं और लड़की मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है। ऐसे में हम याचिका में दखल देना नहीं चाहते। हां, हम अपनी संतुष्टि के लिए चाहते हैं कि जिला जज लड़की और उनके परिजनों से बातचीत करें और शीर्ष अदालत को एक रिपोर्ट पेश करें।’’ इसी दौरान न्यायमूर्ति रमन ने पॉप स्टार ब्रिटनी स्पीयर्स के एक हालिया मुकदमे का जिक्र किया।

बयालीस वर्षीय युवक ने याचिका में खुद को आध्यात्मिक गुरु बताया है और उसका कहना है कि 21 साल की लड़की उसकी शिष्या हैं। याचिका में उन्होंने कहा है कि उनकी शिष्या आध्यात्मिक जीवन के लिए उनके साथ रहना चाहती है, मगर उसके माता-पिता इसका विरोध कर रहे हैं।

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