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बलिया की जानकी को नहीं मिले लापता पति, अस्पताल के बाहर मिला शख्स राहुल निकला

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navbharat times 3 1जानकी की आंखों पर प्रेम की पट्टी बंधी हुई थी। देख ही नहीं पाई कि जिस विक्षिप्त व्यक्ति को वह अपने साथ ले जा रही है, वह उसका पति नहीं बल्कि कोई और है। बलिया के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। 10 साल पहले जानकी का पति गायब हो गया था। बलिया के अस्पताल के बाहर वह एक भिखारी के वेश में मिला। उसे देखते ही प्रेम में सराबोर महिला सुध-बुध खो बैठी। उसे लगने लगा यही उसका पति है। जिसके साथ उसने सात फेरे लिए थे। उसे देखते ही जानकी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे अपने साथ ले जाने लगी। लोगों ने पत्नी के इस प्रेम को देखा तो फोटो-वीडियो बनाने लगे। ऐसे समय में जब महिलाओं को अंजू, सीमा और ज्योति मौर्य के मामलों पर कोस रहे हैं, ज्योति का उदाहरण देने लगे। लेकिन, वायरल होते वीडियो और फोटो ने जानकी के साथ जाने वाले मानसिक विक्षिप्त की असलियत को सामने ला दिया। जानकी का इंतजार और लंबा हो गया। उस व्यक्ति के परिजनों को सूचना मिली, जिसे जानकी ने अपना पति माना था। उसके गांव इस व्यक्ति के ग्रामीण पहुंचे। पहचान की गई तो वह जानकी का पति मोतीचंद मौर्य नहीं निकला। हालांकि, इसके बाद भी उस मानसिक व्यक्ति की जानकी के गांव में पूरी आवभगत की गई।

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राहुल राम निकला शख्स

बलिया जिला अस्पताल के पास 28 जुलाई को सुखपुरा थाना क्षेत्र के देवकली गांव की रहने वाली जानकी मौर्य ने एक मानसिक विक्षिप्त व्यक्ति को देखा। उसे देखते ही जानकी को लगा कि यह उसका पति मोतीचंद मौर्य है। पति समझ कर उसे वह अपने घर ले गई। 10 साल से गायब मोतीचंद के मिलने की सूचना आग की तरह फैली। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने लगा। शनिवार को यह मामला पलट गया। नगरा थाना क्षेत्र के सिकरहटा गांव के लोग देवकली पहुंचे और उस पागल व्यक्ति की पहचान अलग बतानी शुरू कर दी। लोगों ने कहा कि इसका नाम राहुल राम है। इसके गुमशुदगी की रिपोर्ट नगरा थाने में करीब एक माह पहले दर्ज कराया गया था। राहुल राम के परिजनों ने उसकी पहचान की। इसके बाद उसे लेकर सिकरहटा गांव से आए लोग निकल गए।

वायरल हुआ था मामला

28 जुलाई को महिला के पति मिलने का मामला खूब वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर पत्नी के पति को लेकर प्रेम की चर्चा खूब हुई। इस वीडियो को सागर सिंह राहुल ने सोशल मीडिया पर डाला था। इसके बाद यह वायरल हुआ। महिला और उसके कथित पति की स्थिति को जानने सागर देवकली पहुंचा। वहां बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए थे। महिला जिसे मोतीचंद मौर्य समझ कर लाई थी, उसकी पहचान की जाने लगी। मोतीचंद मौर्य के पेट में ऑपरेशन हुआ था। उसका निशान इस व्यक्ति के पेट पर नहीं था। इसके बाद मानसिक विक्षिप्त व्यक्ति की असली पहचान का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद पता चला कि वह मोतीचंद मौर्य नहीं, सिकरहटा गांव का राहुल राम है।

मदद करने पहुंचे थे लोग

मोतीचंद मौर्य के मिलने की खबर और महिला के प्रेम को देखकर बड़ी संख्या में लोग आर्थिक रूप से कमजोर जानकी की मदद करने पहुंचे। इस खबर के बाद सैकड़ों लोग उसके घर पर जुट गए थे। परिवार भी मोतीचंद के मिल जाने को लेकर खुश था। कोई उसे हाथों से खाना खिला रहा था। बूढ़ी मां हाथ से पंखा झल रही थी। सागर ने बताया कि गांव के लोग मोतीचंद की पेट में निशान न देखकर हैरान थे। इसके बाद व्यक्ति की असली पहचान के बारे में जानकारी जुटाई जाने लगी। लोग डीएनए टेस्ट तक कराने की बात करने लगे। इसी बीच उस व्यक्ति की असलियत उजागर हो गई।विक्षिप्त व्यक्ति को लेने आए चचेरे भाई ने बताया कि यह राहुल राम ही है। वह एक महीने से लापता है। इसकी सूचना नगरा थाना में भी दर्ज कराई गई थी। काफी मशक्कत के बाद शनिवार को राहुल के परिजन आकर सुखपुरा थाना के देवकली गांव से नगरा थाना के सिकरहटा गांव अपने घर लेकर चले गए। अब देखना होगी कि आगे यह मामला किस तरफ जाता है।

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