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राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक स्वर्गीय डॉक्टर रामवल्लभ भारती ने शिक्षा जगत में मिसाल कायम किया: किशोर वर्मा

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प्राचार्या रीमा भारती द्वारा लिखित बुकलेट “यादों के झरोखे में पिताश्री ” का किया गया विमोचन 
कयूम खान 
लोहरदगा: राष्ट्रपति अवार्ड प्राप्त शिक्षक स्वर्गीय राम वल्लभ भारती जी की 83 वां जन्मदिन के अवसर पर मंगलवार को गिरिवर शिशु सदन उच्च विद्यालय लोहरदगा प्रांगण में धूमधाम से मनायी गयी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्राप्त शिक्षक किशोर वर्मा, विशिष्ट अतिथि प्राचार्या सुषमा सिंह, प्राचार्य वी. के. बलान्जिनप्पा, वार्ड पार्षद कमला देवी, पत्रकार कयूम खान, सेवानिवृत हेडमास्टर रामलगन साहू थे।कार्यक्रम में सर्वप्रथम भारती जी के फोटो पर दीप  प्रज्वलन कर उनके फोटो में माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत किया गया।
मंच संचालन सरस्वती सिंह और अनामिका भारती द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि लोहरदगा नगरपालिका में सर्वप्रथम 1970 में इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल कर लोगों को अंतराष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी पढ़ने और बोलने की क्षमता विकसित कराना उद्देश्य था। हमेशा शिक्षा के लिए जीते रहे और लोगों को शिक्षित करने का काम करते रहे, उनके दो-दो शिष्य राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त यहां मंच पर विराजमान हैं। इसी से उनकी शिक्षा के प्रति मोटिवेशन और प्रेरणा की एक झलक दिखाई देती है। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक गणेश लाल ने कहा कि डॉ रामवल्लभ सर जी हमेशा मीठी बातों से मोह लेते थे यही संस्कार कहलाता है कि जुबाँ से ही दोस्त और दुश्मन बनते हैं। कयूम खान ने कहा कि भारती सर को गणित में महारत हासिल था।
कठिन से कठिन प्रश्नों को इतना सरल ढंग से हल कर देते थे, और काई प्रकार से हल करते थे, आश्चर्य होता है ऐसे महानतम गणितज्ञ का हमारे बीच से चला जाना असामयिक था। उसकी पूर्ति नहीं हो सकती। बीके. वलान्जिनप्पा ने कहा कि भारती सर स्काउट /गाइड के प्रणोता के रूप में जाने जाते हैं। जिससे बच्चों में कार्य करने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने ही भाष्कर स्ट्रो एसोसिएशन की नींव रखी थी। सुषमा सिंह ने कहा कि स्कूल में सारे के सारे शिक्षिका हैं, यह जानकर बहुत खुशी हुई।
कितने दूरदर्शी भारती सर थे कि कोई भी कामयाबी या नकामयाबी में महिलाओं का योगदान होता है, लेकिन शिक्षा जगत में ऐसे सोच वाले व्यक्ति बिरले ही मिलते हैं। इस अवसर पर स्कूल की प्राचार्या रीमा भारती ने दुरभाष से धन्यवाद ज्ञापन किया। और उनके द्वारा लिखित बुकलेट “यादों के झरोखे में पिताश्री ” का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षिका जयमंती कुमारी, आभा कुजूर, सिद्दीका परवीन, मनीषा कुमारी, अर्पणा सिन्हा, काजल साहू, संगीता वर्मा, सबिता कुमारी, उषा मिश्रा, डोरोथी खलखो, कंचन महतो, बिरेन  देवी, सुमित्रा देवीआदि उपस्थित थी। अंत में  अतिथि गणों द्वारा केक काट  कर जन्मदिन मनाया गया

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