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जेल में ही मनेगी मनीष सिसोदिया की दिवाली, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी जमानत

शराब नीति घोटाला मामले में जेल में हैं मनीष सिसोदिया

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आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति कथित घोटाला मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है.
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एस वी एन भट्टी की पीठ ने सिसोदिया की दलीलें खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया. पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 17 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
मनीष सिसोदिया को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति बनाने (जो बाद में रद्द कर दी गई थी) और लागू करने में कथित अनियमितताओं के लिए धन शोधन और भ्रष्टाचार के आरोप में 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया गया था. तब से वह तिहाड़ जेल में बंद है.मनीष सिसोदिया ने पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी द्वारा दर्ज मामलों में पहले विशेष अदालत और फिर दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से जमानत याचिका ठुकराये जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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मनीष सिसोदिया के वकील की दलील को अदालत ने नहीं माना

 

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी 338 करोड़ के लेनदेन की बात अस्थायी रूप से साबित कर पाई है.कोर्ट ने कहा है कि यदि 6 से 8 महीनों में ट्रायल पूरा नहीं होता या अगले तीन महीने में ट्रायल की गति धीमी रहती है तो मनीष सिसोदिया फिर से जमानत के लिए याचिका दाखिल कर सकते हैं. इसका मतलब ये है कि अगले तीन महीनों तक मनीष सिसोदिया जमानत के लिए अर्जी नहीं लगा सकेंगे.

मनीष सिसोदिया के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा था कि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है. इसके साथ ही जो भी साक्ष्य है वो दस्तावेजी प्रकृति के हैं . इसलिए मनीष सिसोदिया को जेल में रखने का कोई मतलब नहीं है. सिंघवी ने कोर्ट में ये भी दलील दी थी कि मनीष के भागने का कोई खतरा नहीं. परन्तु अदालत ने उनकी दलील नहीं मानी.

मनीष सिसोदिया को 26 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था

 

सीबीआई ने आबकारी नीति ‘घोटाले’ में कथित भूमिका को लेकर सिसोदिया को 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था. इसके बाद से वह जेल में हैं. इसके बाद ईडी ने 9 मार्च को सीबीआई की एफआईआर पर आधारित धनशोधन मामले में जेल में पूछताछ के बाद उन्हें  गिरफ्तार किया था.

30 मई को सीबीआई मामले में जमानत देने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट कहा था कि मनीष सिसोदिया दिल्ली के आबकारी मंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे हैं. ऐसे वो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. 3 जुलाई को हाई कोर्ट ने मनीष सिसोदिया के खिलाफ लगाए गए आरोप को गंभीर प्रकृति का माना था. जांच एजेंसियों का कहना है कि दिल्ली आबकारी नीति के जरिए लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया.

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