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सिमडेगा के जोगबाहर का क़ुडरूम में भी छिपा है अनेकों प्राचीन रहस्य, जिसे संवारने की है जरूरत

सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा भी उठाया जा रहा है विभिन्न पर्यटन स्थलों को जीर्णोद्धार का कार्य

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सिमडेगा : “कुछ ठहरा सा दिखता है , कुछ गहरा सा दिखता है , किसी पाक नज़र या कुदरत का यहां पहरा सा दिखता है “! जी है आज हम आपको सिमडेगा से लगभग दस किमी दूर जोगबाहर पंचायत अंतर्गत क़ुडरूम नामक जगह में ले जाना चाहेंगे। अनुमानतः यह कहना गलत नही होगा की सिमडेगा प्रशासन और बहुत से सिमडेगा वासियों से अनभिज्ञ यह जगह इतिहास के अनेको रहस्य को खोल सकता है बतौर जानने की इच्छा हो । मुख्य पथ से 2 किमी अंदर क़ुडरूम में पेड़ो के बीच एक टूट हुआ छोटा सा कमरा है , और जिसके इर्द गिर्द बहुत सारे पत्थर हैं ! वास्तव में वो कमरा किसी जमाने में एक मंदिर हुआ करता था और जो बिखरे पत्थर हैं उनमे नक्काशी किया हुआ इतिहास के अनेको रहस्य खोलने को तैयार है!

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किसी पत्थर में भगवान गणेश है, किसी में मोर पर सवार भगवान कार्तिके हैं तो कोई पत्थर भगवान शिव की आकृति का वर्णन करता है ! दो अलग अलग बरगद के पेड़ के तने आपस में कुछ इस तरह से जुड़े हुए हैं मानो किसी रहस्यमयी विज्ञान की ओर संकेत कर रहे हो और जड़ो में जिस तरह से बड़े बड़े पत्थर फसे हुए हैं मानो किसी चमत्कारिक दिशा की ओर ले जाना चाहता हो। लेकिन अफशोश आज तक किसी का ध्यान उस ओर गया ही नही है चाहे वो ग्रामीण , जनप्रतिनिधि या प्रशासन हों। नेशनल पॉलर एंड ओशन रिसर्च सेंटर गोआ से पीएचडी किये सिमडेगा के एक विद्यार्थी डॉ आलोक कुमार सिन्हा का ध्यान उस ओर गया

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उन्होंने अर्कयुलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया को मेल किआ, कुछ तस्वीरे भेजी और यह जानने की कोशिश की यह मंदिर कितना पुराना है ! आलोक सिन्हा का अनुमान है की लगभग शाशक जो की झारखंड में लंबे समय तक शाशन किये थे ये मंदिर उसकाल का रहा होगा ! जानने की कोशिश में लगे हुए हैं पर अब तक कोई सफलता हाथ नही लगी है ! गाँव वालो से बात चित के दौरान पता चला की पहले और भी पत्थर थे जिनमे अनेको देवी देवताओ के आकर थे पर एक एक करके लोग चोरी कर लिए और अब कुछ ही शेष बचे हैं!

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आप जब पूरे मंदिर का मुआयना करेंगे तो आपके मन में भी अनेको सवाल उठने लगेंगे की क्यों अब तक इस का रख रखाव नही किया गया ? जिले के जनप्रतिनिधि क्या सिर्फ उसी ओर काम करेंगे जहाँ से उन्हें वोट की आशा होगी ? जिला प्रशासन को क्यों नही लगता है की ये भी हमारी धरोहर है ये भी एक विशेष पहचान दे सकती है सिमडेगा पिछड़ा जिला है और शायद इस पिछड़े पन से उबरने में अभी वर्षों लगेंगे जबकि आज के दिनो में जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन के साथ विभिन्न सांस्कृतिक विरासतों को सहेजें संवारने का काम बेहद जोरों से चल रहा है तो कहीं ना कहीं इस समाचार के माध्यम से जिला प्रशासन के साथ-साथ जिले के जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान आकृष्ट कराना इस समाचार का उद्देश्य होगा और लोगों तक इसकी सार्थक जानकारी पहुंचेगी।

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