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शेल कंपनी मामला: झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, सीएम के भाई, पत्नी और करीबियों पर लगे आरोपो में अपना पक्ष रखने का मिले मौका – कपिल सिब्बल

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रांची: झारखंड में सबसे अधिक चर्चा में रहने वाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े खनन पट्टा आवंटन और शेल कंपनी मामले के अलावा मनरेगा घोटाले से जुड़े जनहित याचिकाओं पर सुनवाई गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन और सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में हुई. इस सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुख्यमंत्री का कोर्ट में पक्ष रखने के लिए वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, शेल कंपनियों की तरफ से वरीय अधिवक्ता आर बछावत, ईडी के अधिवक्ता एस बी राजू और याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार कोर्ट में उपस्थित रहे. वही शेल एक कंपनी की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका को कोर्ट ने खारिज करते दिया गया. क्योंकि हस्तक्षेप याचिका मेल के माध्यम से दायर की गई थी. वही कोर्ट में कहा कि हस्तक्षेप याचिका काउंटर एफिडेविट या अन्य माध्यम से दायर करें. खंडपीठ में मुख्यमंत्री का पक्ष रख रही वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत से समय देने की गुहार लगाते हुए कहा कि शेल कंपनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है. जिसकी सुनवाई होनी बाकी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना चाहिए. 11 जुलाई तक का समय देने की मांग कोर्ट से की. साथ ही कहा कि अदालत के समक्ष दो पेटिशन दायर कर समय की मांग की गई है. इस प्रार्थना को कोर्ट से स्वीकार करने का आग्रह की. वही राज्य सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बहस के दौरान कहा कि हमें मेंटैंबलिटी या मेरिट पर दलील पेश करने से पहले मामले में सीएम के भाई, बहन,पत्नी, कई साथी और करीबीयो को आरोपी बनाया है. अदालत के अंतिम फ़ैसले से सभी प्रभावित होंगे. उन्हें  अपना पक्ष रखने का मौक मिलना चाहिए. सभी पक्षो को सुनने के बाद कोर्ट ने 30 जून को अगली सुनवाई की तारीख मुकर्रर की गई है.

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