Live 7 TV
सनसनी नहीं, सटीक खबर

शेख हसीना ने युद्ध और प्रतिबंधों को रोकने का किया आग्रह

- Sponsored -

भारत के पडोसी देश बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश पर आए संकट और विवादों के समाधान के लिए बातचीत को महत्व दिया है।  साथ ही कहा कि विश्व समुदाय से शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण के लिए हथियारों की होड़, युद्ध तथा प्रतिबंधों को रोकने का आग्रह किया है।

सुश्री हसीना ने शुक्रवार को न्यूयाॅर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77 वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा,“मैं विश्व समुदाय से अंतरात्मा से आग्रह करती हूं कि हथियारों की होड़, युद्ध और प्रतिबंधों पर रोक लगनी चाहिए, बच्चों के लिए भोजन और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा शांति स्थापित की जानी चाहिए।”

उन्होंने कहा,“हमारा मानना ​​है कि युद्ध या आर्थिक प्रतिबंध तथा पाबंदी के उकसावे में प्रतिबंध जैसे विरोध कभी भी किसी भी राष्ट्र के लिए अच्छा नहीं हो सकते।” उन्होंने

कहा,“हम मानते हैं कि संघर्ष के मूल कारणों का समाधान किए बिना, हम शांति बनाए नहीं रख सकते।”

- Sponsored -

- Sponsored -

सुश्री हसीना ने कहा कि बेहतर सहयोग और एकजुटता, साझा समृद्धि और सामूहिक कार्यों के साथ एक शांतिपूर्ण दुनिया देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा,“हम एक दुनिया साझा करते हैं और हम इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर आकार में छोड़ने के लिए ऋणी हैं।” साथ ही उन्होंने कहा,“हम यूक्रेन-रूस संघर्ष का अंत चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि एक देश को प्रतिबंधों और उसके विरोध में प्रतिबंधों से दंडित करने में महिलाओं और बच्चों सहित पूरी दुनिया को दंडित किया जा रहा है। उन्होंने कहा,“इसका प्रभाव एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन और आजीविका को अधिक जोखिम में डालता है और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है। लोग भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा से वंचित हैं। सबसे अधिक बच्चे पीड़ित हैं। उनका भविष्य अंधकार में खो गया है।”

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 77वां सत्र 13 से 27 सितंबर तक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयाॅर्क में हो रहा है जिसमें 193 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख भाग ले रहे हैं। कोविड -19 महामारी के प्रकोप के बाद से पहली बार व्यक्तिगत प्रारूप में इसका आयोजन किया जा रहा है।

यह सत्र ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया भर में खाद्य असुरक्षा के साथ व्याप्त अतिव्यापी संकट मंडरा रहे हैं, मानवीय जरूरतें गहरी हो रही हैं, जलवायु लक्ष्य काफी हद तक अधूरे हैं और असमानता बिगड़ रही है।

Looks like you have blocked notifications!

- Sponsored -

- Sponsored -

Comments are closed.