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सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी,निवेशकों के डूबे पांच लाख करोड़

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नई दिल्ली :शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन बेहद खराब रहा। लाल निशान पर कारोबार की शुरूआत के बाद एक दम से बाजार के दोनों इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी हो गए। सेंसेक्स खुलने के साथ ही 1400 अंक तक टूट गया और फिसलकर 56 हजार के स्तर पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी सूचकांक में भी जोरदार गिरावट आई और यह 410 अंक की जोरदार गिरावट लेते हुए 16,900 के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाजार की शुरूआत के साथ आई इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सोमवार को कारोबारी शुरू होते ही शेयर बाजार में आई इस जबरदस्त गिरावट के चलते निवेशकों को बड़ा घाटा हुआ। लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 258.11 लाख करोड़ रुपए पर आ गया, जो कि बीते कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को 263.47 लाख करोड़ रुपए था। यानी निवेशकों को इस गिरावट के कारण पांच लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लग गया। गौरतलब है कि सेंसेक्स के 30 शेयरों में टीसीएस को छोड़ दें तो बाकी बचे 29 शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं। आज आई गिरावट में वैसे तो ज्यादातर शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। लेकिन इस बीच बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी जा रही है। एसबीआई के शेयर 4 फीसदी तक टूटकर कारोबार कर रहे हैं, जबकि एचडीएफसी के शेयरों में 3 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक का शेयरों में 3.50 फीसदी तक की कमी आ चुकी है। गिरावट वाले दूसरे शेयरों को देखें तो अल्ट्राटेक, डॉ. रेड्डी, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा स्टील बजाज फाइनेंस, इंडसइंड बैंक, बजाज फिनसर्व में 3-3 फीसदी की कमी आई है। एयरटेल, टाइटन, एशियन पेंट्स, मारुति, टेक महिंद्रा, कोटक बैंक, एक्सिस बैंक, विप्रो नेस्ले के शेयर भी 2-2 फीसदी तक टूट चुके हैं।इस गिरावट के चलते मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज और गौतम अडानी के नेतृत्व वाली अडानी विल्मर के शेयरों में भी गिरावट आई है। अडानी विल्मर का शेयर 2.56 फीसदी तक टूट चुका है, जबकि रिलायंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस, आईटीसी और एनटीपीसी के शेयरों में 1-1 फीसदी की गिरावट आई है। सोमवार को बाजार में आई भारी गिरावट की प्रमुख वजह की बात करें तो अमेरिका में महंगाई दर बढ़ने के अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मार्च से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ने का असर भी बाजार पर पड़ा है। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की संभावना भी वैश्विक बाजारों के साथ घरेलू बाजार में गिरावट का कारण बन रही है, जो निवेशकों की धारणाओं को प्रभावित कर रही है।

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