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दिल्ली सरकार को SC की फटकार, हर बार बाहें मरोड़कर पैसे देने को क्यों कहना पड़ता है

कोर्ट ने कहा फंड जारी नही हुआ तो विज्ञापन बजट पर रोक लगाकर होगी पूर्ती

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दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परियोजना के फंड को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आखिर रैपिड रेल परियोजना के लिए दिल्ली सरकार फंड जारी क्यों नही कर रही है। हमें हर बार सरकार की बाहें मरोड़कर पैसे देने को क्यों कहना पड़ता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को रेल परियोजना के लिए फंड रिलीज करने का थोड़ा और समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को करने का फैसला किया है।

 

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल की कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत के आदेश का अनुपालन न होने के चलते वो बेहद परेशान है। दिल्ली सरकार कोर्ट के आदेशों का आंशिक अनुपालन कर रही है. जस्टिस ने कहा कि इसका आंशिक अनुपालन नहीं बल्कि पूरा अनुपालन होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार के मुताबिक 415 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, लेकिन ये राशि NCRTC के खाते में जमा नहीं हुई।

 

सरकार ने कोर्ट से कहा कि उसके पास फंड नही है

 

24 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिल्ली सरकार से रेल परियोजना फंड में हो रही देरी को लेकर पूछा। उस दौरान दिल्ली सरकार ने कहा कि उनके पास फंड नही है। तभी कोर्ट ने दिल्ली सरकार के पिछले तीन साल के विज्ञापन बजट का ब्यौरा मांगा। जिसके बाद दिल्ली सरकार दो महीने के भीतर 415 करोड़ का बकाया देने को राजी हो गई,  लेकिन अब तक इस आदेश का पालन नहीं हुआ। इसी बात को लेकर एक बार फिर कोर्ट ने मंगलवार (आज) दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई और कहा कि ये नौबत ना आए की कोर्ट को जबरन सरकार को दवाब में लेकर फंज जारी कराना पड़ा।

 

कोर्ट ने कहा फंड जारी नही हुआ तो विज्ञापन बजट पर रोक लगाकर होगी पूर्ती

 

पिछली सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अपने तीन साल का विज्ञापन बजट 1100 करोड़ रूपये कोर्ट को सौंपा। दिल्ली सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि इस साल का बजट 550 करोड़ है। मंगलवार आज सुनवाई हुई तो कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि आखिरकार कोर्ट के आदेश को क्यों नही माना जा रहा। दिल्ली सरकार रैपिड रेल परियोजना के लिए फंड क्यों नही जारी कर रही है। ऐसा ना हो कि कोर्ट को दिल्ली सरकार से जबरदस्ती फंड जारी करावाया जाए। फिलहाल कोर्ट ने फंड जारी करने की बात कही है। मामले में अगली सुनवाई 7 दिसंबर को की जाएगी।

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