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संजय पासवान ने दिया विधान परिषद की अनुसूचित जाति जनजाति समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा

पटना: बिहार विधान परिषद् की 34 समितियों के पुनर्गठन पुनर्गठन के महज 6 दिन बाद ही अनुसूचित जाति एवं जनजाति समिति के अध्यक्ष संजय पासवान ने समिति से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा विधान पार्षद संजय पासवान ने अपने साथ जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है। मौजूदा समय में अपनी ही सरकार को दलित अत्याचार के मुद्दे पर दिन-रात कोसने वाली एनडीए के दलित प्रेम को इससे धक्का लगना तय है। बिहार विधान परिषद सभागार में कार्यकारी सभापति अवेधश नारायण सिंह ने नवगठित समितियों के अध्यक्ष व संयोजकों के साथ बैठक की थी। इसी बीच बैठक में शामिल भाजपा विधान पार्षद संजय पासवान ने अपना इस्तीफा कार्यकारी सभापति कार्यकारी सभापति को सौंप दिया। इस्तीफा सौंप कर संजय पासवान सीधे बैठक से बाहर निकल गए। संजय पासवान को अनुसूचित जाति एवं जनजाति समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। डॉ. पासवान से बात करने पर उन्होंने समिति से अपना इस्तीफा दिए जाने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि बिना उनके परामर्श के उन्हें इस समिति का सदस्य बनाया गया था और वो इससे नाखुश थे। कहा कि जरूरी नहीं कि अनुसूचित जाति से आनेवाले को ही अनुसूचित जाति की समिति का अध्यक्ष बनाया जाए। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव का मामला बताते हुए कहा कि असल में इस तरह से अनुसूचित जाति से आनेवाले नेताओं को एक विशेष समुदाय के साथ काम करने के लिए छोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के नेताओं को मुख्यधारा में आने से रोका जा रहा है और इसी का उन्होंने विरोध किया है।

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