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सनसनी नहीं, सटीक खबर

सिलेब्रिटी का दायित्व

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साइना नेहवाल के एक ट्वीट पर साउथ के एक्टर सिद्धार्थ ने जो जवाबी ट्वीट किया, वह इन दिनों विवाद में है। इस ट्वीट का राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस से सिद्धार्थ के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है। इसके साथ ही उसने ट्विटर से भी एक्टर का अकाउंट ब्लॉक करने को कहा है। ये सारी विधिक कार्रवाई तो होती रहेंगी और होनी भी चाहिए, लेकिन इस पूरे विवाद के बीच साइना ने एक बयान जारी कर जो कहा, वह खास तौर पर ध्यान देने लायक है। साइना ने लिखा, मुझे लगता है, यह ट्विटर है जिस पर इस तरह के शब्दों और टिप्पणियों से आप हमेशा ध्यान आकर्षित करते हैं। यह लाइन ट्विटर ही नहीं, सोशल मीडिया के जितने प्लैटफॉर्म हैं, उन सबको आईना दिखाती है। इन दिनों सोशल मीडिया ऐसा प्लैटफॉर्म बन गया है, जहां लोगों को लगता है कि उन्हें आजादी है, कुछ भी कहने की। एक यह भी धारणा बन गई है कि आप जितना विवादित बोलेंगे, उतना पसंद किए जाएंगे। अगर कोई प्लैटफॉर्म आपको बोलने की इजाजत देता है तो उसका मतलब यह नहीं हो सकता कि आप उसका दुरुपयोग करने लग जाएं। किसी से असहमत होने का मतलब यह नहीं होता कि भाषा की मर्यादा ही भुला दी जाए। ऐसा भी नहीं कि जब आप भाषाई मर्यादा लांघेंगे, तभी आपका विरोध दर्ज हुआ माना जाएगा। सिद्धार्थ ने पिछले साल जुलाई महीने में आई सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्प्णी पर शायद ध्यान नहीं दिया, जो कोर्ट ने एक महिला केंद्रीय मंत्री को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी ही ओछी टिप्पणी करने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल महिलाओं को बदनाम करने के लिए नहीं कर सकते। आखिर किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है? आलोचना या मजाक करने की भी एक भाषा होती है। बेशक आलोचना या मजाक करने की भी एक भाषा होती है। आप जब सिलेब्रिटी होते हैं, तब आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि लाखों दूसरे लोग आपका अनुसरण कर रहे होते हैं। आप उनके आदर्श होते हैं। आपका जो व्यवहार होगा, आचरण होगा, उसे दूसरे लोग भी आत्मसात करते हैं। सिद्धार्थ का वह ट्वीट सिर्फ इसलिए नाकाबिल-ए-बर्दाश्त नहीं है कि उन्होंने एक महिला खिलाड़ी के खिलाफ भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया बल्कि इसलिए भी आपत्तिजनक है कि उन्होंने ऐसा करके लाखों दूसरे लोगों को भी ऐसा करने के लिए उद्यत किया है। भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए प्रभावी कानूनी कार्रवाई के साथ ही हम सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। यह मानसिकता खत्म होनी चाहिए कि हम किसी को गालियां देकर अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। जलील मानिकपुरी का एक शेर है- सब कुछ हम उनसे कह गए लेकिन ये इत्तिफाक, कहने की थी जो बात वही दिल में रह गई।

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