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हिनू नदी के किनारे बसे लोगों को हाइकोर्ट से राहत, भवन तोड़ने के नगर निगम के आदेश पर रोक

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने रांची नगर निगम द्वारा हिनू नदी के किनारे बने भवनों को तोड़ने संबंधी पारित आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने प्रार्थी को नगर निगम द्वारा पारित आदेश के खिलाफ उचित फोरम में अपील करने का निर्देश दिया है। रांची के हिनू निवासी राम लखन सिंह ने झारखंड हाइकोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। याचिका में नगर निगम आयुक्त द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाने की मांग अदालत से की गई थी। प्रार्थी के अधिवक्ता राम सुभग सिंह के मुताबिक, याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने नगर निगम के आदेश पर रोक लगा दी है। प्रार्थी की याचिका पर झारखंड हाइकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निगम द्वारा जारी किए गए नोटिस को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जब तक अपीलीय प्राधिकरण में सुनवाई पूरी नहीं होती है, तब तक नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं करेगा। गौरतलब है कि नगर निगम की ओर से वैसे सैकड़ों भवनों को नोटिस जारी किया गया है, जो नदी व जलाशयों के किनारे पर स्थित हैं।

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आरआइटी भवन खाली करने के आदेश पर भी रोक
झारखंड हाई कोर्ट ने कचहरी के पास स्थित आरआइटी भवन को खाली करने के आरआरडीए के आदेश पर रोक लगा दी है। इस संबंध में जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में आरआइटी भवन खाली करने के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने आरआरडीए के भवन खाली करने का आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में आरआरडीए और झारखंड सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई सात मार्च को होगी। इस संबंध में शॉप कीपर एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया कि आरआरडीए ने दिसंबर में एक पत्र जारी कर कहा कि आरआइटी भवन जर्जर हो गया है। कभी भी दुर्घटना हो सकती है। इसलिए इस भवन में स्थित सभी दुकानों को 15 दिनों में खाली कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पहले न तो दुकानदारों को कोई नोटिस दिया गया था और न उस भवन की जांच की गई थी। पत्र में सिर्फ भवन निर्माण विभाग के एक आदेश का हवाला दिया गया, जिसकी जानकारी भी प्रार्थियों को नहीं दी गई है। सरकार की ओर से यहां पर स्थित दुकानदारों को कभी रेंट के नाम पर तो कभी जर्जर भवन की बात कहते हुए परेशान किया जा रहा है। इसलिए आरआरडीए के आदेश पर रोक लगाई जाए। इस पर आरआरडीए ने कहा कि भवन असुरक्षित है और संभावित दुर्घटना को देखते हुए ऐसा आदेश निर्गत किया गया है। इस पर अदालत ने आरआरडीए के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

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