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राजीव गांधी हत्याकांड: राज्यपाल के अधिकार पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह इस सवाल पर विचार करेगा कि तमिलनाडु के राज्यपाल के पास 1991 के राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की माफी संबंधित मामले को राष्ट्रपति को भेजने का अधिकार है या नहीं।
न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की पीठ ने कहा कि वह इस मामले पर सुनवाई करेगी लेकिन राष्ट्रपति के फैसले का उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
तमिलनाडु मंत्रिमंडल ने दोषियों की रिहाई के लिए सितंबर 2018 को राज्यपाल को सिफारिश की थी। 27 जनवरी 2021 को राज्यपाल ने मामले को राष्ट्रपति के पास भेजा दिया था।
केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने कहा कि सजा माफी की दया याचिका मामले में राष्ट्रपति स्वयं निर्णय ले सकते हैं या मामले को राज्यपाल को वापस भेज सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे को नहीं उठाया जा सकता है।
इस पर पीठ ने कहा कि सवाल यह है कि क्या राज्यपाल के पास तमिलनाडु मंत्रिमंडल द्वारा की गई सिफारिश को राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार है? शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 161 का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल तमिलनाडु मंत्रिमंडल द्वारा दी गई एड एंड एडवाइस को मानने को बाध्य हैं।
नटराज ने अपनी ओर से कहा कि राज्यपाल ने पिछले साल जनवरी में इस मामले को राष्ट्रपति के पास भेजा था। इस पर पीठ ने कहा कि है व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ होने के कारण इस मामले में केंद्र को पर्याप्त समय दिया गया है।
तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और अधिवक्ता जोसेफ अरस्तू ने कहा कि कैबिनेट द्वारा की गई सिफारिश को राष्ट्रपति के पास भेजने का राज्यपाल का निर्णय संघवाद के सिद्धांत को नष्ट कर देगा।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने दोषी ए. जी. पेरारीवलन की याचिका पर 27 अप्रैल को सुनवाई के बाद केंद्र से यह पूछा था कि उसे (अदालत) 30 सालों से अधिक समय तक जेल की सजा काट चुके याचिकाकर्ता की रिहाई का आदेश क्यों नहीं देना चाहिए?

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