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11 सूत्री मांगों के समर्थन में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के लोग चार को जलाएंगे मशाल 

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कयूम खान
लोहरदगाः झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा लोहरदगा जिला समिति के  संयोजक प्रो. विनोद भगत, अध्यक्ष अश्विनी कुजूर, कार्यकारी अध्यक्ष अमर किण्डो, महासचिव शाहिद अहमद, सचिव विशेषण भगत, प्रवक्ता अनिल कुमार भगत, कृष्णा ठाकुर, नागेंद्र प्रसाद साहु, चैतू मुंडा, मनोज उरांव, रूस्तम खान आदि ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। जिसमें कहा है कि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा द्वारा झारखंड सरकार को दिए गए मान-सम्मान, पहचान आदि से संबंधित 11 सूत्री मांगों पर अब तक सकारात्मक रूख नहीं अपना कर निष्क्रियता दिखला रही है। आंदोलनकारियों के हित में सरकार को जगाने के लिए अपनी 11 सूत्री मांगों के समर्थन में आगामी 04 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे लोहरदगा जिला समिति के तत्वावधान में लोहरदगा समाहरणालय के समक्ष सांकेतिक रूप में मशाल
 जलाकर आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा। इसके पूर्व 11:00 बजे से समाहरणालय के समीप यूक्लिप्टस मैदान में बैठक होगी। उक्त नेताओं ने कहा है कि हमारी  जिन झारखण्ड आन्दोलनकारियों के त्याग और लम्बे संघर्ष के परिणाम स्वरूप झारखण्ड अलग राज्य का गठन हुआ। झारखण्न्दोलनकारियों ने अपने लम्बे संघर्ष काल में अनेक तरह की उपेक्षाओं एवं तमाम यातनाएं झेली हैं, पलायन हुए हैं, हाशिए का जीवन जीते हैं, घर-व्यापार सभी बर्बाद हुए, भारत के मानचित्र में झारखण्ड अलग राज्य को स्थापित एवं स्वर्णिम इतिहास गढ़ने वाले झारखण्ड आन्दोलनकारियों की मांगों का सरकार समाधान करे। हमारी 11 सूत्री मांगों में 1.झारखण्ड आन्दोलनकारी आयोग का गठन करे जिसमें अध्यक्ष उपाध्यक्ष समेत 11 सदस्य हो और सभी झारखण्ड आन्दोलनकारी हो साथ ही आयोग का कार्यकाल कम से कम 3 वर्ष का हो। आन्दोलनकारियों का चिन्हितिकरण का कार्य जिला स्तरीय तत्कालीन आन्दोलनकारी संगठनों के नेतृत्वकर्त्ता के माध्यम से किया जाए। छुटे हुए आन्दोलनकारियों का पुनः आवेदन करने का अवसर दिया जाए। मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, एन० ई० होरो, बिनोद बिहारी महतो, निर्मल महतो, देवेन्द्र माझी, सीपी तिर्की, डॉ० रामदयाल मुंडा, डॉक्टर बीपी केसरी, लाल रण विजय नाथ शाहदेव, रीतलाल प्रसाद वर्मा, एके राय, सोबरन अंसारी, बसीर अहमद सहित हमारे सभी अमर पुरोधा झारखण्ड आन्दोलनकारियों को महान झारखण्ड रत्न देकर अविलंब राजकीय पहचान व सम्मान प्रदान किया जाए। राज्य के दिशुभ गुरु शिबू सोरेन से लेकर 1-1 झारखण्ड आंदोलनकारियों साहित्यकारों, कलाकारों एवं पत्रकारों को भी चिन्हित कर पहचान सुनिश्चित करें एवं झारखण्ड आन्दोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा दिया जाए, साथ ही राजकीय सम्मान समारोह आयोजित कर विशिष्ट पहचान पत्र देकर सम्मानित किया जाए एवं राजकीय गजट में प्रकाशित किया जाए। 2. भारत सरकार के गृह एवं कारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 1952 के तहत जेल जाने की बाध्यता को समाप्त करते सभी झारखण्ड आन्दोलनकारियों को स्वतंत्रत सैनानियों या पूर्व विधायकों के समान पेंशन दिया जाए।झारखण्ड सरकार, गृह विभाग, संकल्प संख्या 6, विविध 1013 / 2008-2108 का पालन करते हुए झारखण्ड आन्दोलनकारियों को चिकित्सा सुविधा, आश्रितों को पेंशन का लाभ सुनिश्चित किया जाए। झारखण्ड आन्दोलनकारियों के मामलों के निष्पादन हेतू कल्याण बोर्ड एवं न्यायाधिकरण का गठन किया जाए। 3. झारखण्ड के राजधानी समेत प्रमुख शहरों एवं अन्य जगहों पर झारखण्ड आन्दोलन के शहीदों, झारखण्ड आन्दोलनकारियों के नाम पर चौक-चौराहों मार्गों एवं संस्थानों का नामकरण किया जाए एवं झारखण्ड आन्दोलनकारी कॉरीडोर का निर्माण किया जाए।4.झारखण्ड आन्दोलनकारियों के आश्रित पुत्र-पुत्री को राज्य सरकार की सेवा में नियुक्ति का प्रावधान किया जाए एवं निःशुल्क उच्चतर शिक्षा (लकनीकी एवं गैर-तकनीकी तक की व्यवस्था किया जाए। 5.आन्दोलनकारियों को झारखण्ड राज्य आवास बोर्ड की कॉलोनियों में मकान आवंटित करने की नीति तय की जाय एवं आवास हेतु न्यूनतम 20 डिसमिल जमीन एवं कृषि कार्य हेतु न्यूनतम 5 एकड़ जमीन की बन्दोबस्ती की जाए। 6. झारखण्ड आन्दोलनकारियों की राज्य एवं सभी जिलों के परिसदनों में निशुल्क रहने की सुविधा प्रदान की जाय। 7. झारखण्ड आन्दोलनकारियों को राज्य के अन्दर कहीं भी मुफ्त यात्रा पास एक सहयोगी के साथ (सरकारी बसों में) रेल यात्रा के दौरान निशुल्क यात्रा नीति तय की जाए। 8. पंजीकृत आन्दोलनकारियों के स्वयं एवं आश्रितों के ईलाज हेतु राज्य के सभी चिकित्सालयों में विशिष्ट श्रेणी की मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाय। 9. राज्य, कमिश्नरी, जिला, अनुमंडल, प्रखण्ड स्तरीय राज्य सरकार की सभी समितियों, निगम, बोर्ड, प्राधिकारों में आन्दोलनकारियों की सहभागिता का 50% तय किया जाय एवं राज्य सरकार की 20 सूत्री, 15 सूत्री, निगरानी समितियों के सभी स्तरों पर आन्दोलनकारियों को 50% स्थान दिया जाय। 10. आन्दोलनकारी वित्त निगम का गठन किया जाए एवं शहरी क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र एवं अधिसूचित क्षेत्रों में आन्दोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को स्वरोजगार की विशेष योजनाएं बनाकर लाभान्वित किया जाए एवं ब्याज रहित पचास लाख रूपये 50 लाख तक का ऋण मुहैया किया जाए। 11. ठेकादारी एवं खनन पट्टा स्वीकृति हेतु सभी प्रकार के खनिजों की लीज ऑर्डर में आन्दोलनकारियों को प्राथमिकता दी जाए। एवं राज्य सरकार द्वारा निर्गत किये जाने वाले सभी प्रकार के व्यापारिक लाईसेन्सों में आन्दोलनकारियों का कोटा 25% तय किया जाए एवं कार्यादेश भी सुनिश्चित की जाए शामिल हैं।
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