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ओलंपिक काउंटडाउन: बजरंग, विनेश पर टिकी उम्मीदें

नई दिल्ली: सात सदस्यीय भारतीय कुश्ती दल, जिसमें चार महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं, 23 जुलाई से शुरू होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों में जब हिस्सा लेंगे तो उन पर उम्मीदों पर भारी बोझ होगा। सात फ्रीस्टाइल पहलवानों की टीम के पास न केवल भारत के एकमात्र व्यक्तिगत डबल ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार की प्रतिष्ठा पर खरा उतरने का काम होगा, बल्कि कुछ हालिया घटनाओं के मद्देनजर खेल को इसके आसपास की नकारात्मकता से ऊपर उठाने की प्रतिबद्धता भी होगी।

सुशील से जुड़ी घटनाओं के अलावा सुमित मलिक सोफिया में विश्व ओलंपिक क्व ालीफायर इवेंट में डोप टेस्ट में नाकाम होने की घटना भी इन खिलाड़ियों के जेहन में होगी और ये पदक दिलाकर भारतीय कुश्ती फैंस के बोझिल मन को हल्का करने की कोशिश करेंगे। अगर 2016 के रियो ओलंपिक से पहले नरसिंह यादव ने ध्यान खींचा था, तो इसी तरह का कुछ टोक्यो के लिए रवाना होने से पहले हो रहा है, जिसमें विनेश फोगट, सोनम मलिक और बजरंग पुनिया जैसे कुछ संभावित पदक उम्मीदवारों से ध्यान हट गया है।

बुडापेस्ट को अपना प्रशिक्षण आधार बनाने वाली विनेश 2019 विश्व चैंपियनशिप में 53 किग्रा वर्ग में नूर-सुल्तान में कांस्य के साथ भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल किया था। वह शायद देश के लिए सर्वश्रेष्ठ पदक की उम्मीद हैं। विनेश की हर कीमत पर जीतने की इच्छा घुटने की गंभीर चोट के कारण क्व ार्टर फाइनल में 2016 रियो ओलंपिक से बाहर होने की निराशा से जुड़ी है। अपनी तरह की प्रतिबद्धता के साथ, विनेश 2016 के रियो ओलंपिक में साक्षी मलिक की उपलब्धि को पीछे छोड़ सकती हैं, जहां उन्होंने 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था। विनेश की ताकत उसका संकल्प रहा है और उसने एक अन्य प्रतिबद्ध पहलवान बजरंग पुनिया (65 किग्रा) के साथ 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में गौरव हासिल किया।

हाल ही में विनेश ने 2017 और 18 में दो रजत पदक जीतने के बाद अल्माटी में अपना पहला एशियाई चैम्पियनशिप स्वर्ण पदक जीता था। वास्तव में, यूक्रेन में एक टूर्नामेंट में 2017 विश्व चैंपियन को हराकर एक प्रमुख प्रदर्शन के बाद 2021 में यह उनका तीसरा स्वर्ण था। जहां विनेश ने जकार्ता में शानदार प्रदर्शन के साथ 2014 इंचियोन एशियाई खेलों के कांस्य पदक को स्वर्ण में बदल दिया, वहीं पुनिया ने जकार्ता में अपने इंचियोन रजत को सुनहरा रंग दिया। इसने एक ऐसी प्रक्रिया को गति प्रदान की जिसने आज उन्हें टोक्यो में पदकों का प्रबल दावेदार बना दिया है और 2012 लंदन में सुशील के रजत पदक में सुधार करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि उनका प्रशिक्षण अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है, हाल ही में एक मामूली डर था क्योंकि रूस में एक स्थानीय टूर्नामेंट के दौरान पुनिया को दाहिने घुटने में चोट लगी थी।

वह सेमीफाइनल मुकाबले में चोटिल होने के बाद मैट से बाहर आ गए थे, लेकिन पुनिया के जॉर्जियाई कोच शाको बेंटिनिडिस ने उन आशंकाओं को दूर कर दिया और कहा कि उनका चेला ओलंपिक चुनौती के लिए फिट है। सोनीपत के मदीना गांव की रहने वाली किशोरी सोनम मलिक भारतीय दल की ब्लैक हॉर्स हो सकती हैं क्योंकि महज 19 साल की उम्र में वह घरेलू और अंतरराष्टÑीय प्रतियोगिताओं में एक के बाद एक बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। साक्षी, 2016 रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता, एक वर्ष की अवधि में चार बार – ट्रायल में तीन बार-को हराने का मतलब है कि सोनम स्टारडम के दरवाजे पर दस्तक दे सकती हैं-यदि टोक्यो ओलंपिक में नहीं, तो 2024 में पेरिस में उनके चमकने के पूरे आसार हैं।
भारतीय दल : पुरुष: रवि कुमार दहिया (57 किग्रा), बजरंग पुनिया (65 किग्रा), दीपक पुनिया (86 किग्रा)
महिला: सीमा बिस्ला (50 किग्रा), विनेश फोगट (53 किग्रा), अंशु मलिक (57 किग्रा), सोनम मलिक (62 किग्रा)।

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