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नीट-पीजी : सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को आदेश पारित करेगा


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नयी दिल्ली, 06 जनवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय मेडिकल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को आरक्षण देने की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि वह शुक्रवार को अपना आदेश पारित करेगा।
न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं और आरक्षण का समर्थन कर रही केंद्र सरकार का पक्ष विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार, फैसले के लिए सात जनवरी सूचीबद्ध की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के साथ ही स्नातकोत्तर स्तर की राष्ट्रीय पात्रता का प्रवेश परीक्षा-2021 (नीट-पीजी) परिणाम के आधार पर नामांकन के लिए शीघ्र काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होने एवं नामांकन होने की उम्मीद है। राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेजों में अखिल भारतीय कोटे की सीटों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण को लेकर विवाद चल रहा है। सरकार ने उनके परिवार की 8 लाख रुपए तक की वार्षिक आय की सीमा तय की है।
पीठ इस मापदंड तय करने का तौर तरीका जानना चाहता था। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 30 नवंबर 2021 को एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसने 31 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों हलफनामा दाखिल कर अदालत को बताया था कि आठ लाख रुपये की सीमा उचित है।

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ईडब्ल्यूएस) को आरक्षण देने की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि वह शुक्रवार को अपना आदेश पारित करेगा।
न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं और आरक्षण का समर्थन कर रही केंद्र सरकार का पक्ष विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार, फैसले के लिए सात जनवरी सूचीबद्ध की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के साथ ही स्नातकोत्तर स्तर की राष्ट्रीय पात्रता का प्रवेश परीक्षा-2021 (नीट-पीजी) परिणाम के आधार पर नामांकन के लिए शीघ्र काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होने एवं नामांकन होने की उम्मीद है। राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेजों में अखिल भारतीय कोटे की सीटों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण को लेकर विवाद चल रहा है। सरकार ने उनके परिवार की 8 लाख रुपए तक की वार्षिक आय की सीमा तय की है।
पीठ इस मापदंड तय करने का तौर तरीका जानना चाहता था। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 30 नवंबर 2021 को एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी, जिसने 31 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों हलफनामा दाखिल कर अदालत को बताया था कि आठ लाख रुपये की सीमा उचित है।
इससे पहले बार-बार मापदंड का आधार बताने के शीर्ष अदालत के आदेश के बाद सरकार द्वारा स्पष्ट रुख नहीं अपनाने के बाद पीठ में 25 अक्टूबर को काउंसलिंग पर रोक लगा दी थी।
काउंसलिंग की प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के कारण अभ्यार्थी डॉक्टर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे थे।
पीठ ने राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में राष्ट्रीय स्तर अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी और ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण देने के मद्देनजर सरकारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा, “हम ऐसी स्थिति में हैं, जहां राष्ट्रीय हित में काउंसलिंग शुरू होनी है।”
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मौजूदा मानदंडों के अनुसार ईडब्ल्यूएस कोटा के लिए सभी पात्र उम्मीदवारों को पंजीकरण के लिए उनके प्रमाण पत्र मिल गए हैं। इसके मद्देनजर सरकारी कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ा दी गई।
श्री मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार ने व्यापक परामर्श एवं हर पहलू पर गौर करने के बाद आरक्षण लागू करने का फैसला किया है तथा इससे सामान्य श्रेणी के छात्र-छात्राओं को नुकसान नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान श्री मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान मामले में यदि परिवार में तीन सदस्यों की प्रति वर्ष तीन-तीन लाख रुपए आय होती हैं, तो ऐसी स्थिति में उनकी आय नौ लाख रुपए मानी जाएगी और वे ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अंतर्गत नहीं आएंगे।
केंद्र सरकार के तमाम स्पष्टीकरण के बावजूद कई याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने तर्क दिया कि आठ लाख रुपये की आय सीमा तक तय करने के लिए कोई उचित अध्ययन या अभ्यास नहीं किया गया है।
नील ऑरेलियो नून्स एवं अन्य ने पीजी पाठ्यक्रमों में मौजूदा शैक्षणिक सत्र से अखिल भारतीय स्तर के कोटे में ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने के केंद्र की गत वर्ष 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती दी है। अधिसूचना के अनुसार पीजी पाठ्यक्रमों में 50% सीटें अखिल भारतीय कोटे से भरने के प्रावधान किए गए हैं

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