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पुस्तक पाठन को बढ़ावा देने की जरूरत : मोदी

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डिजीटल युग में लोगों की स्क्रीन पर बढ़ते समय में भी पुस्तकों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने पर बल देते हुए आज लोगों का आ’’ान किया कि वे वर्ष 2022 में अपने पसंद की पांच पांच किताबों की चर्चा करें जिससे अन्य लोग पुस्तकों के प्रति प्रेरित हों।श्री मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में लोगों का यह आ’’ान किया। उन्होंने तेलंगाना के 84 वर्षीय डॉक्टर कुरेला विट्ठलाचार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विट्ठलाचार्य जी की बचपन से एक इच्छा थी कि वो एक बड़ा सा पुस्तकालय खोलें।

देश तब गुलाम था, कुछ परिस्थितियां ऐसी थीं कि बचपन का वो सपना, तब सपना ही रह गया। समय के साथ विट्ठलाचार्य जी, व्याख्याता बने, तेलुगु भाषा का गहन अध्ययन किया और उसी में कई सारी रचनाओं का सृजन भी किया। 6-7 साल पहले वो एक बार फिर अपना सपना पूरा करने में जुटे। उन्होंने खुद की किताबों से पुस्तकालय की शुरुआत की। अपने जीवनभर की कमाई इसमें लगा दी। धीरे-धीरे लोग इससे जुड़ते चले गए और योगदान करते गए। यदाद्रि-भुवनागिरी जिले के रमन्नापेट मंडल के इस पुस्तकालय में करीब 2 लाख पुस्तकें हैं।

उन्होंने कहा कि विट्ठलाचार्य जी कहते हैं कि पढ़ाई को लेकर उन्हें जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, वो किसी और को न करना पड़े। उन्हें आज ये देखकर बहुत अच्छा लगता है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल रहा है। उनके प्रयासों से प्रेरित होकर, कई दूसरे गांवों के लोग भी पुस्तकाल बनाने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा भारत कई अनेक असाधारण प्रतिभाओं से संपन्न है, जिनका कृतित्व दूसरों को भी कुछ करने के लिए प्रेरित करता है। विट्ठलाचार्य जी इसकी मिसाल है कि जब बात अपने सपने पूरे करने की हो, तो उम्र कोई मायने नहीं रखती।

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श्री मोदी ने कहा कि किताबें सिर्फ ज्ञान ही नहीं देतीं बल्कि व्यक्तित्व भी संवारती हैं, जीवन को भी गढ़ती हैं। किताबें पढ़ने का शौक एक अद्भुत संतोष देता है। आजकल लोग ये बहुत गर्व से बताते हैं कि इस साल मैंने इतनी किताबें पढ़ीं। अब आगे मुझे ये किताबें और पढ़नी हैं। ये एक अच्छा रुझान है, जिसे और बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं भी ‘मन की बात’ के श्रोताओ से कहूंगा कि आप इस वर्ष की अपनी उन पाँच किताबों के बारे में बताएं, जो आपकी पसंदीदा रही हैं। इस तरह से आप 2022 में दूसरे पाठकों को अच्छी किताबें चुनने में भी मदद कर सकेंगे।

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ऐसे समय में जब हमारा स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है, पुस्तक पाठन अधिक से अधिक लोकप्रिय बने, इसके लिए भी हमें मिलकर प्रयास करना होगा।’’ प्रधानमंत्री ने लखनऊ के रहने वाले निलेश जी की एक पोस्ट की चर्चा करते हुए कहा कि निलेश जी ने लखनऊ में हुए एक अनूठे ड्रोन शो की बहुत प्रशंसा की है। ये ड्रोन शो लखनऊ के रेजÞीडेंसी क्षेत्र में आयोजित किया गया था। 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम की गवाही, रेजÞीडेंसी की दीवारों पर आज भी नजर आती है।

ड्रोन शो में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अलग-अलग पहलुओं को जीवंत बनाया गया। चाहे ‘चौरी चौरा आन्दोलन’ हो, ‘काकोरी ट्रेन’ की घटना हो या फिर नेताजी सुभाष का अदम्य साहस और पराक्रम, इस शो ने सबका दिल जीत लिया। आप भी इसी तरह अपने शहरों के, गांवों के, आजादी के आन्दोलन से जुड़े अनूठे पहलुओं को लोगों के सामने ला सकते हैं। इसमें तकनीक की भी खूब मदद ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव, हमें आजादी की जंग की स्मृतियों को जीने का अवसर देता है, उसको अनुभव करने का अवसर देता है। ये देश के लिए नए संकल्प लेने का, कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति दिखाने का, प्रेरक उत्सव है, प्रेरक अवसर है।

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