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गाजा युद्ध की त्रासदी झेल रही 50 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाएं मौत के कगार पर !

गाजा में हमास और इजरायल की लड़ाई का बेहद दर्दनाक तस्वीर ।

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अखिलेश अखिल
युद्ध चाहे जहाँ भी हो उसका सबसे ज्यादा ऐसे महिलाओं और बच्चो पर ही पड़ता है। युद्ध के दौरान बम और गोलियों से लाशें तो गिरती हैं लेकिन महिलाये और बच्चे तिल -तिल कर जीने को अभिशप्त होती है और बेहद दारुण स्थित में उसकी मौत होती है। कभी -कभी ऐसा भी होता है कि महिलाओं को भयानक अमानवीय और क्रूर परिस्थितियों से गुजरना होता है। अपनी इज्जत की बाजी भी लगानी होती है। लेकिन यह सब होने के बाद भी वह बच नहीं पाती। हालिया गाजा में हमास और इजरायल की लड़ाई का बेहद दर्दनाक तस्वीर यह सामने आ रही है कि इस गाजा के युद्ध क्षेत्र  में 50 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाये मौत के कगार पर पहुँच गई है। वे बेवस हैं और उनके लिए कोई आसरा भी नहीं। इनमे अधिकतर महिलाये विस्थापन की शिकार हैं और दर्द को दबाये हुए खुद और गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाने के लिए इधर -उधर भागने को विवश हैं। गोलिया चलती है और बम के धमाके होते हैं और कुछ ही क्षणों में सब कुछ बिखर जाता है और अभी थोड़ी देर पहले जो महिला अपने गर्भ को बचाने के लिए बचने का प्रयास कर रही थी अचानक शांत हो जाती है।

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गाजा की लड़ाई में मौत का तांडव

गाजा की लड़ाई का अंतिम परिणाम चाहे जो होगा लेकिन इतना तो सच है कि इस ;लड़ाई में एक पीढ़ी का ख़त्म होता दिख रहा है। वर्चस्व की लड़ाई का यह तांडव महिलाओं पर बज्र के सामान है। उनका कोई अब नहीं बचा है। पुरुष या तो मारे जा चुके हैं या बचे भी है तो अस्पतालों में कराह रहे हैं। अस्पतालों की हालत ये है कि वहां न दवा है ,न हवा पानी। न डॉक्टर है और नहीं कोई खाने की व्यवस्था। बहुत से मरीज तो भूख और पानी के अभाव में ही दम तोड़ रहे हैं। लाशो का अम्बार लगा हुआ है। कौन सी लाश किसकी है इसकी भी पहचान कौन करे !    चारो तरफ मौत ही मौत का तांडव है। इजरायल कह रहा है कि वह हमास के लोगों को जमींदोज करके ही मानेगा और उधर हमास के आतंकी किसी भी सूरत में इजरायल को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहता। दम्भ और शक्ति की यह लड़ाई कहाँ ख़त्म होगी यह कोई नहीं समझ रहा है लेकिन इस लड़ाई में महिलाये ,बच्चे और बूढ़े मरते जा रहे हैं।

गर्भवती महिलाओं का बुरा हाल

युद्ध के इलाके में फांसी गर्भवती महिला दर्द से कराह रही है। डॉक्टर की पुकार की जा रही है लेकिन डॉक्टर करे क्या ? कहाँ ले जाए ? कहाँ इलाज करे ? अस्पताल अँधेरे में डूबा हुआ है। वहां बिजली कटे आज  20 दिन से ज्यादा हो गए। इजरायल ने भोजन और पानी की लाइने भी काट रखी है। जेनरेटर से चलने वाले अस्पताल में भी अब  जनरेटर के लिए तेल नहीं है। उधर संयुक्त राष्ट्र लगातार चिल्लाये जा रहा है कि इंसानियत  का खून नहीं हो लेकिन यूएन की आवाज को सुन कौन रहा है ? युद्ध के गर्जन से महिलाये डरी हुई है। उनके पेट में पलने वाले बच्चे सलामत भी हैं या नहीं यह भी किसी महिला को पता नहीं। दो चार दिनों तक पेट में दर्द होता है और फिर वह भी शांत हो जाती है।  संयुक्त राष्ट्र जनसँख्या कोष ने एक आंकड़ा पेश किया है और कहा है कि युद्ध के इलाके में करीब 50 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाये घिरी हुई है और वह सुविधाओं के अभाव में मौत के कगार पर है। इन महिलाओं की नियमित जांच नहीं हो रही है। जिन महिलाओं के पास और भी छोटे बच्चे हैं वे सब भूख और पानी से पीड़ित हैं। मताये कुछ समय के लिए बच्चों को खुद के स्तन का दूध तो देना चाहती है लेकिन भोजन और पानी के अभाव में माता के साटन का दूध भी सुख चुका है।

गाजा में कही कोई आसरा नहीं

इस युद्ध क्षेत्र में कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं जो काफी प्रयास यानी आईवीएफ के चक्र के जरिये गर्भवती हुई है। अब उन्हें लग रहा है कि गर्भपात न हो जाए। बम के धमाकों से महिलाएं डरी हुई है और उनका गर्भपात न हो इसके लिए इधर उधर भगति फिर रही है। कई महिलाये युद्ध क्षेत्र से निकलकर किसी बड़े सुरक्षित शहर की तरफ जाती हैं लेकिन वहां भी कोई सुरक्षा नहीं। लड़ाके झुण्ड में आते हैं वे या तो बम छोड़ जाते हैं या फिर किसी भी महिला टोली पर हमला भी कर जाते हैं।

 

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