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मिशन कोयला तस्करी धनबाद, टॉरगेट 500 करोड़- जिम्मेवारी गोयल, लाला, राय और ओझा को मिली

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उपराजधानी दुमका से मिल रही है संजीवनी, बहती गंगा में हाथ धो रहे सभी
मूक दर्शक बने वरीय अधिकारी, राजनीतिक लॉबी से नही चाहते नुकसान
कमलेश कुमार ‘राजा’
धनबाद : कोयलांचल धनबाद में राष्ट्रीय संपत्ति कोयले की लूट पर अंकुश लगाना अब शायद संभव नहीं। जिलें के बड़े अधिकारी मूक दर्शक बन बहती गंगा की धार को चुपचाप देखकर, धीरे से हाथ धोकर अपने आपको पवित्र कर ले रहे है। शायद उनको भी अच्छी तरह से पता है की वे कुछ नही कर सकते। ज्यादा हाथ पैर मारना उन्हे नुकसान पहुंचा सकता है। बड़ी ताकतों ने खुलेआम ऐलान कर दिया है की अब धनबाद की कमान उनके हवाले है। बड़ी ताकतों में शामिल लाला,गोयल,राय,ओझा को उपराजधानी दुमका से संजीवनी मिल चुकी है। तस्करी के सारे समीकरणों की बिसात का तानाबाना सोरेन के आवास पर तय हो चुका है। टारगेट कोयला तस्करी मिशन 500 करोड़ हासिल करने को लेकर किसी भी परिस्थिति से निपटने की पूरी तैयारी हो चुकी है।
उपराजधानी दुमका में बनी योजना की रणनीति
जानकारों की माने तो बंगाल का कुख्यात कोल तस्कर लाला ने भी एक बार फिर झारखंड के खनिज संपदा पर अपनी निगाहें गड़ा दी है। चल रहे सिंडिकेट को और ताकत देने का हवाला देते हुए अपने साथ मिला लिया है। योजना की रणनीति उपराजधानी दुमका में बनी, उसके नेतृत्व में प्रतिमाह 500 करोड़ की राष्ट्रीय संपत्ति कोयला लूटने की योजना बनाई गई। मुख्यालय रांची से लेकर कोयला राजधानी धनबाद तक एक एक मोहरे को ढंग से सजाया गया। पेशगी के रूप में करोड़ों की राशि का भुगतान किया गया है। जिसमें दर्जनों नेता, पुलिस अधिकारी, मीडिया हाउस, पत्रकार और स्थानीय दबंग को सूचीबद्ध करके समेटा गया है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू रही की योजना के तहत बीच बीच में आम जनता को दिखाने के लिए खानापूर्ति के कार्रवाई को दिखाना भी शामिल किया गया।
जिसने भी खबर लिखी वो नासमझ है
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार दैनिक सन्मार्ग में कोयला लूट और गोयल की खबर प्रकाशित होते ही सिंडिकेट सदस्यों ने मुखिया गोयल को अखबार की कटिंग दिखाई, जिस पर गोयल ने कुटिल मुस्कान भरते हुए कहा जिसने भी खबर लिखी है अभी वो नासमझ है, लॉबी की पटकथा से काफी दूर है। हमसभी तो व्यवसाय करते है। उसके लाभ से समाजसेवा भी करते है। उनसे हजारों लोगों की रोजी रोटी चलती है। वो अलग बात है की कभी कभार घटना दुर्घटना घट जाती है लेकिन उसके बाद भी हमलोग पीड़ित परिवार की पूरी मदद करते है।
समाज के नाज को व्यवस्था के आगे झुकते देख हुए असहज
जिलें में पदस्थापित समाज के एक बड़े अधिकारी,जिस पर समाज को नाज था, समाज के लोगों को लगता था की अब उसके समाज से कोई बड़ा अधिकारी जिलें में आया है अब उनलोगो को खास तब्बजो मिलेगी। उनकी नाक शान से ऊंची होगी। लेकिन जब उक्त अधिकारी को भी व्यवस्था के आगे लाचार देखा तो गली चौराहों में दूसरे समाज के लोगों के बीच चर्चा करने में असहज महसूस करने लगे।

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