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महाष्टमी आज, व्रती करेंगे मां महागौरी की उपवास रखकर पूर्जाचना

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रांची: शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी का व्रत बुधवार मनाया जायेगा। व्रती महाष्टमी की दिनभर उपवास रखकर विधिपूर्वक पूजार्चना करेंगे। महाष्टमी को लेकर व्रती मंगलवार को शुद्ध रूप से नहा-धोकर भोजन किया। महाष्टमी की पूजा महिलाएं, कुंवारी लड़कियां और पुरूष भी करते हैं। दुर्गा महाष्टमी के व्रत का विशेष महत्व है। दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरुप की आराधना की जाती है। इधर, राजधानी रांची के विभिन्न पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ सोमवार (षष्ठी) से ही जूटने लगी है। मंगलवार को भी पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ देखी गई।
हालांकि कोरोना गाइडलाइन के कारण पंडालों में लोगों के प्रवेश पर पाबंदी है। इसलिये पंडालों में सामान्य वर्षों की
तुलना में भीड़ कम देखी जा रही है। पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं के मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है और सेनिटाइजर की भी व्यवस्था की गई है।
महागौरी की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र एवं महत्व
शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी व्रत या दुर्गा अष्टमी व्रत का विशेष महत्व होता है जो लोग नवरा​त्रि के प्रारंभ वाले दिन
व्रत रखते हैं, वे दुर्गा अष्टमी का भी व्रत रखते हैं। दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरुप की आराधना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,भगवान शिव को पाने के लिए कई वर्षों तक मां पार्वती ने कठोर तप किया था, जिससे उनके शरीर का रंग काला हो गया था जब भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए तो उन्होंने उनको गौर वर्ण का वरदान भी दिया। इससे मां पार्वती महागौरी भी कहलार्इं। महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी को व्रत करने और मां म​हागौरी की आराधना करने से व्यक्ति को सुख, सौभाग्य और समृद्धि भी मिलती है। सब पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
मंगलवार की रात 9.47 बजे से महाष्टमी प्रारंभ
इस बार महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी की सही तारीख को लेकर लोगों में दुविधा की स्थिति है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी ति​थि को ही महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है। इस वर्ष आश्विन शुक्ल अष्टमी ति​थि का प्रारंभ आज मंगलवार की रात 09.47 बजे से हो रहा है, जो 13 अक्टूबर दिन बुधवार को रात 08.07 बजे तक है। ऐसे में दुर्गा अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर दिन बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन ही मां महागौरी की पूजा की जाएगी।
धूमधाम से हुई मां कालरात्रि का पूजा
मंगलवार को सप्तमी तिथि होने के कारण मां दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूर्जा-अर्चना धूमधाम से की गई। मां कालरात्रि अपने नाम के स्वरूप रात्रि के समान काली हैं। उनके बाल बिखरे हुए हैं और गधे को अपनी सवारी बनाती हैं। मालूम हो कि इस वर्ष षष्ठी तिथि का लोप हुआ है। षष्ठी तिथि सोमवार की सुबह 6.27 बजे से मंगलवार की सुबह 4.04 बजे तक रहा। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो गई।

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