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लोक अदालत त्वरित न्याय प्रदान करने का बेहतर मंच है: पीडीजे

राष्ट्रीय लोक अदालत में 1391 मामले का निस्तारण

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मेदिनीनगर: लोक अदालत त्वरित न्याय पाने का बेहतर मंच है। उक्त बातें पलामू के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार चौबे ने कही। वे शनिवार को नालसा के निर्देश व झालसा के तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन द्वीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि आज जिले में एक साथ दो महापर्व मनाया जा रहा है। एक राष्ट्रीय लोक अदालत व दूसरा चुनाव का महापर्व है। दोनों महापर्व की सार्थकता जनमानस पर ही निर्भर है । उन्होंने कहा कि लोक अदालत का एकमात्र उद्देश्य सुलभ व त्वरित न्याय प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि मामले का निपटारा पहले भी होता था आज भी हो रहा है। परंतु लोक अदालत के माध्यम से दोनों पक्षकारों को दिल मिला कर त्वरित न्याय किया जाता है। व न्यायालय द्वारा उसको कानूनी जामा पहना दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से समाज में विकृति दूर हो जाती है। उन्होंने कहा कि जमीन विवाद ही अपराधिक मुकदमा को बढ़ावा देता है। इसलिए हम लोगों का प्रयास होता है जितने भी सिविल के व सुलहनिय आपराधिक मामले हैं उसे लोक अदालत के माध्यम से निपटारा किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में कोर्ट के अलावे कोर्ट के बाहर के मुकदमे भी समाप्त किए जाते हैं।इस मौके पर उपायुक्त शशि रंजन ने कहा कहा कि जटिल न्याय प्रक्रिया में जाने से बचने का लोक अदालत एक बेहतर प्लेटफार्म है। उन्होंने कहा कि जितने ही मामले आपसी सुलह समझौता पर निपटारा हो सकते हैं ।निपटारा कराएं। उन्होंने कहा कि प्रीलिटिगेशन के मामले भी लोक अदालत में निपटाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सुलह समझौता ही त्वरित न्याय का सबसे बड़ा विकल्प है ।उन्होंने कहा कि बुधवार और शनिवार को जिले के बिभिन्न थानों में थाना दिवस मनाया जा रहा है। जिसमें स्थानीय स्तर पर आपसी विबाद मारपीट व रेवेन्यू से सम्बंधित है का निपटाने का प्रयास किया जा रहा है ।उन्होंने कहा कि लोक अदालत में मामले निस्तारण से पक्षकारों में समरसता बना रहता है । इस मौके एडीजे प्रथम संतोष कुमार ने कहा कि आपसी सुलह समझौता से मामले निस्तारण के लिए लोक अदालत का आयोजन किया जाता है ।उन्होंने कहा कि सिविल के किसी भी तरह का मुकदमा निपटारा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से पीड़ित परिवारों को चेक प्रदान कर उनके जख्म को भरने का प्रयास किया जाता है ।इस मौके पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद यादव ने कहा कि गांव में रहने वाले गरीब व्यक्ति को लोक अदालत के प्रति आस्था ज्यादा बढ़ा है ।उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत आपराधिक मुकदमे जमीन से संबंधित ही आते हैं। ऐसे में अगर जमीन सम्बंधित मामले का निस्तारण समय पर हो जाएगा तो आपराधिक मुकदमा का संख्या स्वत: कम हो जाएगा। अधिवक्ता संघ के महासचिव सुबोध कुमार सिन्हा ने कहा कि लोक अदालत की उपयोगिता अब काफी बड़ा है। न्यायालय पर मुकदमे का बोझ कम करने में लोक अदालत की सार्थकता काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जिला अधिवक्ता संघ भी अधिकारियों के साथ कंधा में कंधा मिलाकर लोगो को सुलभ न्याय दिलाने का काम कर रहा है। यही वजह है कि लोक अदालत की सफलता की कहानी मामले का निष्पादन बयां कर रही है। इस मौके पर मंच का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अर्पित श्रीवास्तव ने किया ।उन्होंने भी लोक अदालत की महता पर विस्तार से चर्चा की। लोक अदालत में मामले निस्तारण को ले 13 पीठो का गठन किया गया था। इसमे सुलह समझौते के आधार पर 1391मामले का निस्तारण किया गया। पीठ संख्या एक में 133 मामले निपटाए गए ।पीठ संख्या दो में 648, पीठ संख्या तीन में 25 मामले ,पीठ संख्या चार में 23 मामले ,पीठ संख्या छह में 15 मामले ,पीठ संख्या सात व आठ में छह छह मामले निपटाए गए। पीठ संख्या नव में 14 मामले ,पीठ संख्या 10 में 258 मामले व पीठ संख्या तेरह में 263 मामले निपटाए गए। मामले मामले इस मौके पर डी जे अभिमन्यु कुमार ,विनोद कुमार सिंह,सीजीएम निरुपम कुमार ,संजय सिंह यादव , अरविन्द कच्छप,शिखा अग्रवाल , परमानंद उपाध्याय ,रितु कुजुर, अमित गुप्ता, मनोज कुमार, सतीश कुमार मुंडा, चंदन कुमार गोस्वामी सुश्री अपेक्षा सुश्री रूबी श्यामलाल सरोज, अधिवक्ता संतोष कुमार पांडे,,अशोक कुमार मिश्रा, संजय कुमार सिन्हा, कुमार शिवाजी सिंह, अशोक प्रसाद ह्णसतीश कुमार, पीएनबी मुनेश्वर राम के अलावे सभी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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