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मिलकर गुरू और चेला विकास के नाम पर खूब किया खेला

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रामप्रसाद सिन्हा

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पाकुड़: सदियों से गुरू और चेला का एक दुसरे के प्रति सहानुभुति और वफादारी की रही है और इसी परिपार्टी को मुल मंत्र मानते हुए झारखंड राज्य के पाकुड़ जिले में विकास की गाथा लिखी गयी और लिखी भी जा रही है। अंतर सिर्फ यह है कि पहले गुरू अपने शिष्य यानी चेला को शत मार्ग पर चलने के साथ त्याग और समर्पण की राह दिखाते थे, लेकिन अब विकास के नाम पर और चेला को खेला करने का गुर सिखा रहे है। पाकुड़ जिले में मिलकर गुरू और चेला ने विकास के नाम पर ऐसा खेल खेला है कि नियमो की अनदेखी तो हुई ही दुसरे के काबिलियत पर भी सवाल खड़ा हुआ। यह सब हुआ है पाकुड़ जिले के ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के अधीन बीते पांच वर्षो के दौरान कराये गये विकास कार्यो में। गुरू और चेला के मेल ने योजनाओ का प्राक्कलन बनाने से लेकर उसके विचलन में भी बड़ी भुमिका निभायी। इस विभाग के कार्यपालक अभियंता के विशेष आशीर्वाद के कारण चार कनीय अभियंताओ के बावजुद सिर्फ एक कनीय अभियंता कौशल किशोर भगत को जिले के 6 प्रखंडो में बनाये गये प्रखंड सह अंचल कार्यालय के साथ ही उच्चस्तरीय पुल का निरीक्षण और मापी पुस्तिका का संधारण करने की जिम्मेदारी दे दी गयी। गुरू का आशीर्वाद था और चेले ने विकास के नाम पर जमकर खेल खेला। गुरू और चेला के गठजोड़ के कारण इसी विभाग में पदस्थापित तीन अभियंता सिर्फ हाजिरी बनाने और सरकार से वेतन लेने का काम करते रहे। कार्यपालक अभियंता के विशेष आशीर्वाद की वजह से जिले में मुख्यमंत्री ग्रामसेतु योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में बनने वाले तिरपतिया नदी, गुमानी नदी, राजबांध नदी, पगला नदी, किरता नदी, ब्राम्हणी नदी, साफी नदी, काना नदी एवं बाड़ु एवं मुर्गाबनी के बीच नदी पर पुल बनाने में बतौर कनीय अभियंता कौशल किशोर भगत द्वारा योजना की निगरानी एवं विपत्र बनाने का काम किया गया। जिले के सिर्फ एक उच्चस्तरीय पुल महेशपुर प्रखंड के बांकुड़ा में पगला नदी पर बनाये गये पुल में कार्यपालक अभियंता द्वारा दुसरे अभियंताओ को निगरानी एवं विपत्र बनाने की जिम्मेवारी दी गयी। इतना ही नही गुरू और चेला के आपसी तालमेल का ही नतिजा रहा कि जिले के 6 प्रखंडो में करोड़ो रूपये की राशि से बनाये गये प्रखंड से अंचल कार्यालय भवन में निगरानी और विपत्र बनाने का काम सिर्फ और सिर्फ कनीय अभियंता कौशल किशोर भगत ने किया। गुरू और चेला द्वारा मिलकर विकास के नाम पर खेले गये खेल को लेकर अंदरखाने यह भी चर्चा है कि आखिर एक ही कनीय अभियंता एक दिन में चल रही सारी योजनाओ की निगरानी कैसे किया करता था। इस गुरू और चेले के गठजोड़ ने सिर्फ ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल में ही विकास की गाथा नही लिखी बल्कि जिला परिषद एवं पर्यटन विभाग की राशि मंे भी दोनो ने बड़ी भुमिका निभायी। ठेकेदारो की माने तो अपने जिले के इस गुरू चेला को जिले के विकास की बागडोर थामे एक विकास पुरूष के नाम से विख्यात एक जिलास्तरीय अधिकारी ने कनीय अभियंता श्री भगत को जिला परिषद के अलावे पर्यटन विभाग की योजनाओ की निगरानी एवं विपत्र बनाने की जिम्मेदारी दिलाने में बड़ी भुमिका निभायी और इसके एवज में लाखो करोड़ो रूपये का वस्तु विनिमय प्रणाली के तहत खेल भी हुआ। फिलहाल गुरू का स्थानांतरण हो गया है और चेला भी अपना स्थानांतरण कराने के लिए एक खास मंत्री, एक विधायक और पूर्व विधायक जो निकट के खास रिस्तेदार के रूप में जाने जाते है के यहां चक्कर लगाना शुरू कर दिया है। हालांकि कार्यपालक अभियंता ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल अशोक कुमार से जब चार कनीय अभियंता के रहने के बावजुद सिर्फ और सिर्फ कनीय अभियंता कौशल किशोर भगत से वर्षो तक काम लिये जाने को लेकर सम्पर्क किया गया तो उन्होने बताया कि मेरे पाकुड़ पदस्थापन के पहले से ही कनीय अभियंता श्री भगत उच्चस्तरीय पुल एवं जिले के सभी प्रखंडो में बनाये गये प्रखंड सह अंचल कार्यालय भवन की निगरानी और विपत्र बनाने के लिए लगाये गये थे। कार्यपालक अभियंता ने बताया जिले के महेशपुर प्रखंड के बांकुड़ा में पगला नदी पुल निर्माण में विभाग में पदस्थापित सभी अभियंताओ को निगरानी एवं विपत्र बनाने में लगाया गया था। अंदरखाने में चर्चा तो यह भी यदि बीते पांच साल के दरमियान ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, जिला परिषद, पर्यटन विभाग एवं विधायक निधि की वैसी योजनाए जिसका प्राक्कलन सृजन, निगरानी और विपत्र की सही तरीके से जांच हो गयी तो वित्तीय अनियमितता एवं योजनाओ के क्रियान्वयन में घपलेबाजी में बहुत बड़ा खुलासा हो सकता है। कनीय अभियंता बहरहाल जिले में गुरू और चेला द्वारा मिलकर विकास के नाम किये नाम किये गये खेला की जबरदस्त चर्चा है।
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