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सनसनी नहीं, सटीक खबर

पुरवा में जन रोप भईया, एक धान में सोलह पईया

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जीतेन्द्र गिरि
मैकलुस्कीगंज:बारिश कम होने से किसान चिंतित है। धान रोपने का अंतिम समय अगस्त महीना भी मात्र एक सप्ताह ही रह गया है।  जुलाई महीने में समुचित बारिश नहीं होने से किसान कृषि कार्य शुरु ही नहीं कर पाए। किसान जून-जुलाई महीना में ही धान बीज की बोआई पूर्ण कर लिया था। पर जुलाई महीना में तपती धूप के कारण खेत में लगा धान का बिचड़ा सूख कर मर गए। इस वर्ष   बारिश नहीं होने से चारों ओर सूखाड़ जैसी स्थिति बन गई है, जिससे किसानों के सामने बड़ी समस्या आ गई है। धान रोपनी की अंतिम तिथि 31अगस्त मानी जाती है। इस दिन के बाद किसान धान की रोपनी नहीं करते हैं। सुखा पड़े खेत में पिछले सप्ताह हुई लगातर मध्यम दर्जे की बारिश से खेतों में कुछ पानी इकट्ठा हुआ।  किसान खेतों हल बैल ले कर  उतरे। लेकिन इधर धान का बिचड़ा बूढ़ा हो गया है। कहीं कहीं पानी के अभाव में बिचड़ा सुख गया। खेतों में रोपनी लायक पानी नहीं हैं। फिर भी किसान धान की रोपनी किसी तरह से कर अपने को सन्तुष्ट कर रहे हैं।

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क्या कहते हैं किसान
लपरा पंचायत  के किसान रामलखन भगत, राजुमुंडा और धानेश्वर टाना भगत ने बताया कि कृषि कार्य का समय लगभग अंतिम चरण में है। खेत में धान का बिचड़ा धूप में झूलस कर नष्ट हो गया। बाजार से उन्नत धान बीज खरीद कर खेत में डाले थे। एक तिहाई धान आ बिचड़ा सूख कर मर गया। घर में जो भी पूंजी था वह खेती शुरु होने के साथ ही लगा दिए।  बारिश हुई तो नीचले जमीन पर ही धान की रोपाई संभव पाया है। वे कहते हैं, इस परिस्थिति में साल भर परिवार का पालन पोषण कैसे होगा। यही सोच कर हमलोग का बुरा हाल है।
क्षेत्र को सुखाड़ घोषित करें सरकार
किसानों ने राज्य सरकार से क्षेत्र को सुखाड़ घोषित कर आर्थिक मदद करने की मांग की  हैं। बाजार से किसान उन्नत  किस्म का धान बीज ऊंची दाम पर खरीद कर खेतों में बुआई किया पर बारिश ने सारे मंसूबे पर पानी फेर दिया। इस इस वर्ष अब तक लगभग 25% धान की रोपनी हो चुकी है अगर इंद्र भगवान  साथ साथ देंगे तो 40 से 50% धान की रोपनी की जा सकती है। लेकिन अंतिम समय में  वर्षा होने के बावजूद भी धान रोपने से  मनी नही आएगी। समुचित वर्षा होने के बावजूद भी।31अगस्त से पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र  शुरू हो जायेगा।किसान कवि घाघ कहते है पुरवा में जन रोप भईया, एक धान में सोलह पईया। यानी पुरवा  नक्षत्र में धान रोपने से मना कर रहे हैं। रोपने बाद भी सोलह आना धान पइया होगा। किसान धान की रोपनी कर तो रहे है लेकिन फसल घर आएगा, इसकी उम्मीद कम ही है।
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