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शीतकालीन ओलंपिक का भारत ने किया बहिष्कार

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नई दिल्ली : चार से 20 फरवरी के बीच बीजिंग में आयोजित होने वाले शीतकालीन ओलंपिक का भारत ने बहिष्कार कर दिया है। अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों के बाद भारत ने बीजिंग ओलंपिक के बहिष्कार का समर्थन किया है। चीन की चाइना कम्यूनिस्ट पार्टी ने मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए हांग कांग, तिब्बत और अपनी उइगर आबादी की शोषण किया है। साथ ही शीतकालीन ओलंपिक के जरिए चीन अपनी छवि सुधारना चाह रहा है। इसी के विराध में अमेरिका सहित कई देश ओलंपिक का बहिष्कार कर रहे हैं।

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अमेरिका के द्वारा शुरू की गई इस मुहिम में भारत के शामिल होने के बाद अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के चेयरमैन ने भारत की सराहना की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा “मैं बीजिंग ओलंपिक के राजनयिक बहिष्कार में शामिल होने के लिए भारत की सराहना करता हूं। हम उन सभी देशों के साथ खड़े हैं जो सीसीपी के जघन्य मानवाधिकारों के हनन और ओलंपिक 2022 को राजनीतिक जीत में बदलने के प्रयास को खारिज करते हैं।
अमेरिका ने सबसे पहले शीतकालीन ओलंपिक के राजनयिक बहिष्कार की घोषणा की थी। इसके बाद से अब तक आॅस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, एस्टोनिया, जापान, कोसोवो, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, स्वीडन और ब्रिटेन जैसे देशों ने आंशिक रूप से या पूरी तरह से इस बहिष्कार को समर्थन दिया है। अमेरिका के नेतृत्व वाले इस बहिष्कार को कम करने के लिए चीन ने कड़ी मेहनत की है। अब भारत भी इन देशों के साथ शामिल हो चुका है।
चीन अपनी उइगर आबादी के साथ कठोर व्यवहार, हांगकांग में बढ़ती अधीनता, तिब्बत के दमन, दक्षिण चीन सागर में अवैध क्षेत्रीय दावों और ताइवान के खिलाफ जबरदस्ती के मामले पर दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रिया का सामना कर रहा है। चीन के शिनजियांग में दस लाख से अधिक मुसलमानों को यातना शिविरों में कैद किया गया। पिछले साल लगभग 700,000 तिब्बती किसानों और खानाबदोशों के साथ जबरदस्ती हुई। तिब्बतियों को जबरन विचार परिवर्तन, घुसपैठ निगरानी, राजनीतिक पुन: शिक्षा, सैन्य-शैली के अधीन किया गया। इन सभी मामलों पर दुनियाभर में चीन का विरोध हो रहा है।

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