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पूजा सिंघल के यहां छापेमारी में अलार्मिंग दस्तावेज हाथ लगे : ईडी, हाई कोर्ट ने कहा- सीलबंद लिफाफे में जमा करें, देखेंगे

मामला : शेल कंपनियों में निवेश का

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रांची : हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत में शुक्रवार को शेल कंपनी में निवेश मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाल के दिनों में एजेंसी ने राज्य में कार्रवाई की है। भ्रष्‍टाचार के संगीन मामलों में आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल केठिकानों पर हुई छापेमारी में बहुत अलार्मिंग दस्तावेज हाथ लगे हैं। जिसे एजेंसी कोर्ट को दिखाना चाहती है। इस मामले में सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि हम ये दस्‍तावेज जरूर देखना चाहेंगे। इसे सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट के रजिस्‍ट्रार जनरल के जरिये अदालत में जमा कराएं। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि झारखंड के समाचार पत्रों में हर दिन इस बात की खबरें आती हैं कि राज्य में अवैध खनन हो रहा है। ना सिर्फ बालू, स्टोन चिप्स बल्कि कोयले के अवैध खनन की भी बातें आती हैं, जो काफी चिंताजनक है। इस मामले में रांची डीसी की ओर से शपथ पत्र दायर करने पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस मामले में खनन विभाग के कोई जिम्मेदार अधिकारी शपथ पत्र दायर करेंगे। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या रांची उपायुक्त को खनन विभाग की सारी जानकारी है, जिसको देखते हुए उन्होंने शपथ पत्र दाखिल किया है। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के अनुसार यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। जिस पर अदालत ने कहा कि उन्हें भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद अदालत ने 17 मई को इस मामले की सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। इस इस दिन माइनिंग लीज दिए जाने के मामले की भी सुनवाई होगी।

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