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प्रयागराज में दोनों नदियों का जलस्तर वर्ष 1948 के बाढ़ की ओर चला

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प्रयागराज : संगम नगरी प्रयागराज में पतित पावनी गंगा और श्यामल यमुना नदियों में बाढ़ का पानी एक बार फिर वर्ष 1948 की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है।देश की आजादी के एक साल बाद 1948 में प्रयागराज के लोगों ने भीषण बाढ़ का सामना किया था। शहर से गांव तक के अधिकांश इलाके बाढ़ से प्रभावित थे। उन दिनों गंगा का जलस्तर 86.06 मीटर पहुंच गया था जबकि यमुना का जलस्तर 86.12 मीटर पर था।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त आंकडो के अनुसार गंगा 12 बजे गंगा का जलस्तर 85.75 मीटर, छतनाग 84.66 मीटर और नैनी (यमुना) 85.70 मीटर दर्ज किया गया है। तब और अब के आंकडो से पता चलता है कि गंगा का जलस्तर मात्र वर्ष 1948 के जलस्तर को छूने में मात्र 31 सेंटीमीटर जबकि यमुना 42 सेंटीमीटर दूर रह गयी हैं ।
आंकडों के अनुसार पिछले 24 घंटे (शनिवार 12 बजे) में देखा जाए तो गंगा 40 सेंटीमीटर, 34 सेंटीमीटर और यमुना में 39 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी है। पिछले दो घंटे के दौरान दोनों नदियों के जलस्तर की वृद्धि में प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी है। वर्तमान स्थित में दोनो नदियां दो सेंटीमीटर से घटकर एक संटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही है। ंिसचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड) का कहना है कि गंगा-यमुना में वृद्धि की गति कम होना राहत के संकेत हैं। जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने बताया कि गंगा और यमुना के खतरे के निशान से ऊपर बहने के चलते तटीय क्षेत्रों में मजिस्ट्रेटों के साथ आपदा राहत की टीमें लगाई गई हैैं। एनडीआरएफ एवं जल पुलिस की टीमें बाढ़ में फंसे लोगों का रेस्क्यू कर रही हैैं। आवागमन के लिए नावें और स्टीमर भी लगाई गई है। आपदा प्रभारी और एडीएम वित्त व राजस्व जगदंबा ंिसह ने बताया कि पांच हजार से ज्यादा लोग 15 बाढ़ राहत शिविरों में शरण ले चुके हैैं। राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से हाई अलर्ट घोषित करते हुए प्रभावित मोहल्लों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस और पीएसी की बाढ़ राहत कंपनी दिन-रात नाव और स्टीमर से पेट्रोंिलग कर रही है। जिला प्रशासन की ओर से 69 नाव चलाई जा रही है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा नानक शरण ने बाढ़ पीड़तिों के लिए क्षेत्र में बनाए गये शरणालय पतंजलि ऋषिकुल, उच्च माध्यमिक विद्यालय राजापुर, एवं वाईएमसीए कालेज सिविल लाइंस की बाढ़ चौकियों में स्वास्थ्य सुविधाओं का निरीक्षण किया तथा बाढ़ पीडित परिवारों से मुलाकात कर हालचाल लिया। आंकडो के अनुसार प्रयागराज में वर्ष 1948 से लेकर 2019 तक 10 बार गंगा और यमुना की जलस्तर में भारी वृद्धि दर्ज की गयी है। वर्ष 1948 में गंगा और यमुना का जलस्तर क्रमश: 86.06 और 86.12 मीटर, वर्ष 1956 में 86.28 और 86.31मीटर , वर्ष 1967 में 86.88 और 86.56 मीटर, वर्ष 1971 में 85.91 और 85.79, वर्ष 1978 में 87.09 और 87.10मीटर, वर्ष 1983 में 86.56 तथा 86.73 मीटर, वर्ष 2003 में 85.98 और 85.65 मीटर, वर्ष 2016 में 86.16 और 86.02 मीटर जबकि वर्ष 2019 में 85.78 और 85.54 मीटर दर्ज किया गया था।

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