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फतेहपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने लगाया पूरा जोर

फतेहपुर : सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी ने फतेहपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर गंभीर है तथा इस प्रतिष्ठापूर्ण सीट को हथियाने के लिए जिला संगठन ने प्रदेश नेतृत्व को 03 नाम भेजे हैं। वहीं इस चुनाव को लेकर जनपद के राजनैतिक गलियारे में गर्माहट बढ़ने लगी है। सियासतदारो की नजÞर पार्टी के निर्णय पर टिकी है । वहीं कयासों का दौर भी शुरू हो गया है। तमाम तर्क और वितर्को के बीच सूत्रों का दावा है कि जÞपि के निवर्तमान चेयरमैन प्रतिनिधि अभय प्रताप का दावा काफÞी मजÞबूत है और उन्हीं को समर्थन मिलना तय है। पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा जिला संगठन ने क्षेत्रीय अध्यक्ष के जरिए प्रदेश नेतृत्व को तीन नाम भेजे हैं, जिनमें सबसे मजबूत दावेदार के रुप में अभय प्रताप का नाम है। ख़बर है कि अभय प्रतान ने अपने आवेदन के साथ 25 जिप सदस्यों का समर्थन पत्र भी संलग्न किया है। बड़ी बात यह है कि इन 25 सदस्यों में भाजपा के निर्वाचित जÞपि सदस्य शामिल नहीं हैं। इस चुनाव में भाजपा के 10 सदस्य जीत कर आए हैं जिनमें अभय प्रताप भी हैं। पिछले जÞपि अध्यक्ष के चुनाव में अभय प्रताप की पत्नी डा. निवेदिता सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था। उस समय प्रदेश में सामाजवादी पार्टी की सरकार थी और जिले की राजनीति में बड़ा नाम जननायक सिंह यादव सपा से प्रत्याशी थे। तत्कालीन सरकार के आदमकद मंत्री गायत्री प्रजापति और जनपद के प्रभारी बाबू दर्शन सिंह यादव पूरी तैयारी से जिले में डेरा डाले थे, बावजूद इसके निवेदिता सिंह की छ: वोट के तर से जीत के बाद जिले अभय प्रताप के प्रभाव का हर कोई लोहा मानने लगा था। वैसे उस चुनाव में उनके बड़े भाई डीसीबी के पूर्व चेयरमैन उदय प्रताप उफर्Þ मुन्ना सिंह की भी काफÞी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।विपरीत परिस्थितियों में पिछली बार जÞपि अध्यक्ष के चुनाव में मिली जीत इस चुनाव में अभय प्रताप के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। पार्टी का बड़ा नेता भी इस तर्क को झुठला नहीं पा रहे हैं कि जब तब जीते थे तो अब दावा बनता है। उधर भाजपा जिला संगठन द्वारा प्रदेश नेतृत्व को भेजे गए दो अन्य नामों में एक नाम महेश यादव का बताया जाता है। महेश जÞपि की ऐरायां सीट से चुनाव जीते हैं, यह वही सीट है जिससे सूबे के राज्य मंत्री रणवेंद्र प्रताप के पुत्र आदित्य प्रताप सिंह ने भी भाजपा से समर्थन मांगा था किन्तु इंकार हो जाने पर बागी प्रत्याशी के रुप में भारी तामझाम से नामांकन कराया था। यह अलग बात है कि हो हल्ला मचने के बाद आदित्य ने नाम वापस ले लिया था ।

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