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लोगों को वैक्सीन लेने के लिए कैसे मनाएं

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गौतम पटेल और सिमरन सराफ
पूरी दुनिया में इन दिनों कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की दहशत काफी तेजी से फैल रही है। कोविड-19 से बचने के लिए टीका लगवाना अत्यंत जरूरी है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में किए गए एक शोध से पता चला कि अधिकतर लोग वैक्सीन की पहली खुराक तो ले रहे हैं, लेकिन वे इसकी दूसरी खुराक नहीं ले रहे हैं। हमने व्यवहार विज्ञान की सहायता से उत्तर प्रदेश सरकार के लिए राज्य के निवासियों को टीकाकरण के लिए राजी करने के कुछ उपाय ढूंढे हैं। इसके लिए हमने ग्लोबल कोविड-19 ट्रेंड्स एंड इंपैक्ट सर्वे या सीटीआईएस के डेटा का विश्लेषण किया है। यह सर्वे यूनिवर्सिटी आॅफ मैरीलैंड, सोशल डेटा साइंस सेंटर और फेसबुक द्वारा संचालित किया गया है। इसके लिए हर महीने फेसबुक यूजर्स को टीका लगवाने और कोविड-19 से संबंधित चिंताओं के बारे में प्रश्नों का उत्तर देने को कहा गया। जनवरी 2021 से नवंबर 2021 तक उत्तर प्रदेश में कुल 52,776 लोगों ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया। सीटीआईएस के अनुसार जिन लोगों ने कोविड की वैक्सीन नहीं लगवाई, वैक्सीन ना लगवाने के पीछे उन्होंने कुछ वजहें बताईं। इन लोगों का कहना था कि चूंकि दूसरे लोगों को इस समय टीके की अधिक आवश्यकता है, इसलिए उन्होंने टीका नहीं लगवाया। उनका यह भी कहना था कि वे थोड़ा रुक कर देखेंगे और अगर यह सुरक्षित हुआ तभी टीका लगवाएंगे। इसके अलावा टीका न लगवाने वाले लोग टीके से संबंधित साइड इफेक्ट से भी चिंतित दिखे। इस सर्वे में केवल 9 प्रतिशत रेस्पॉन्डेंट टीके के बिल्कुल खिलाफ थे। इन लोगों ने कहा कि वे निश्चित रूप से टीका नहीं लगवाएंगे क्योंकि वे नहीं मानते टीके की जरूरत है, टीका काम नहीं करेगा, वे टीके को पसंद नहीं करते हैं, या फिर वे सरकार पर भरोसा नहीं करते। वहीं 24 फीसदी टीकारहित लोग (कोविन डेटा) और 9 फीसदी वे लोग, जो निश्चित तौर पर टीका नहीं लगवाएंगे- इनके बीच का 15 प्रतिशत का अंतर उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्हें पहली खुराक लेने के लिए तैयार करना चाहिए। इस समूह की संख्या करीब 2 करोड़ है और ये भरोसेमंद संदेशवाहकों और प्रभावकारी लोगों (यानी ऐसे लोग जो उनके जैसे हैं या वे लोग, जिनकी सलाह पर ये लोग ध्यान देते हैं) के जरिए टीकाकरण के लिए मनाए जा सकते हैं। इन लोगों को टीका न लगवाने के गंभीर परिणाम (संभवत: मृत्यु) समझाने की आवश्यकता है। इस सर्वेक्षण में हमने पाया कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने में देर लगा रहे हैं। 3 दिसंबर 2021 तक, उत्तर प्रदेश में 43 लाख से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक के लिए दो हफ्ते से ज्यादा की देर हो चुकी थी। दूसरी खुराक के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जनसंचार के माध्यमों का समुचित और सुविचारित उपयोग किया जा सकता है। दूसरा तरीका यह है कि लोगों की स्थानीय सामाजिक भलाई की भावना पर जोर दिया जा सकता है, उदाहरण के लिए अपने प्रियजनों को अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु से बचाने की भावना पर। इसके अलावा लोगों के सामने सामाजिक प्रमाण पेश करना चाहिए कि दूसरी खुराक लेने से बेहतर परिणाम मिलता है। व्यवहार विज्ञान जनसंचार के अलावा और भी कई सारे सुझाव देता है। एक नजरिया व्यक्ति केंद्रित संचार है, जिसमें सरकार को हर व्यक्ति तक पहुंचना होगा। दूसरी खुराक के लिए कोविन द्वारा भेजे गए एसएमएस रिमाइंडर में लोगों के नाम और उसी नंबर पर पंजीकृत अन्य लोगों के नाम शामिल किए जा सकते हैं। शोधकतार्ओं ने यह भी देखा कि टीकों के लिए स्लॉट बुक करने और लोगों को टीकों के बारे में सूचित करने से टीकाकरण की संख्या बढ़ जाती है। स्लॉट बुक करना एक विश्वास भरा कदम है क्योंकि इनको रद्द करने के लिए लोगों को औचित्य देना होगा। जिन लोगों के पास पहली खुराक लेने के लिए अच्छे व्यक्तिगत कारण थे, दूसरी खुराक से इनकार करना उनके लिए मुश्किल होगा।
( ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं)

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