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सनसनी नहीं, सटीक खबर

कितनी बड़ी है भारत के खिलाफ साजिश?

अपने देश में राज्यों की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे चाइनीज वायरस कोरोना पीड़ितों के आंकड़ों को जोड़ने के बाद केंद्र सरकार प्रतिदिन बताती है कि देश में कितने नए मरीज सामने आए, कितनी मौतें हुईं, कितने ठीक हुए। साथ ही, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से यह भी बताया जाता है कि अब तक देश में कुल कितने लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं, कितने लोग इसके कारण काल का ग्रास बने हैं और कितने ऐसे हैं जो इसे मात दे चुके हैं। इसके अनुसार, अब तक देश में आधिकारिक रूप से 2.69 करोड़ लोग चाइनीज वायरस की चपेट में आए, जिनमें से 3.07 लाख लोगों की मौत हो गई। हालांकि किसी भी शहर, गांव, कस्बे या राज्य की बात कर लें, जितनी मौतें सरकार बताती है, वे श्मशानों में जलने वाली और कब्रिस्तानों में दफन की जाने वाली लाशों से बहुत कम होती हैं। हर आदमी यह बात महसूस करता है कि रोगियों और मृतकों की संख्या वास्तविक नहीं है। राज्य सरकारों द्वारा कोरोना से मौतों के आंकड़े छिपाने के दो कारण समझ में आते हैं। पहला कारण यह कि यदि वास्तविक आंकड़े जारी कर दिए तो उनकी शासन व्यवस्था की पाले खुल जाएगी और उनकी छवि धुल जाएगी। दूसरा कारण यह कि इसके कारण लोगों में डर ज्यादा बैठ जाएगा, पूर्ण लॉकडाउन लगाना पड़ेगा, जिससे उद्योग-धंधे ठप हो जाएंगे और सरकार की कमाई चौपट हो जाएगी। इसी कारण सरकार कोरोना से होने वाली मौतों को भी आसानी से टाल जाती है। मृत्यु प्रमाण पत्रों पर इतना भर लिखना होता है कि फलां व्यक्ति की मौत कोरोना के कारण नहीं बल्कि अन्य गंभीर बीमा​री जैसे दिल का दौरा, दिमाग का दौरा या किसी अन्य महत्वपूर्ण अंग के काम करना बंद कर देने से हुई है। वहां बस इतनी-सी बात छिपाई जाती है कि मृत्यु से कुछ दिन पहले ही उसे कोरोना का संक्रमण हुआ था और उसी के कारण दिल या दिमाग का दौरा पड़ा। और इस तरह, चाइनीज वायरस ने जो जान ली थी, उसे सामान्य मौत प्रमाणित कर दिया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी अनुमान है कि दुनिया में कोरोना की वजह से मौत के आंकड़े आधिकारिक संख्या से 2 से 3 गुना ज्यादा हो सकते हैं। किन्तु हैरानी की बात है कि दुनियाभर का मीडिया सिर्फ भारत की छवि खराब करने में जुटा है। अमेरिका के अग्रणी समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्स ने तो भारत को बदनाम करने के लिए इतनी बेतुकी खबर छापी कि खुद ही मजाक बन गया। उसने 12 लोगों से बात कर छाप दिया कि भारत में पिछले सालभर में कोरोना से लगभग 42 लाख लोगों की मौत हुई है और 70 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित या बीमार हुए हैं। मतलब भारत में हर दूसरे आदमी को चाइनीज वायरस का संक्रमण हो गया था? इस पर भला कौन भरोसा करेगा? भारत की छवि खराब करने की उसे कितनी हड़बड़ी थी, यह उसकी रिपोर्ट से ही पता चल जाता है। उसकी रिपोर्ट में एक समूह ने कहा कि 40 करोड़ लोग संक्रमित हुए और 6 लाख लोग मरे। दूसरे समूह ने कहा कि 53 करोड़ रोगी हुए और 16 लाख मरे। कहां 6 लाख और कहां 42 लाख? सात गुना का अंतर! वह शायद वामपंथी शासन वाले अमेरिका को भारत से बेहतर बताना चाहता था, लेकिन वास्तविकता को तो छिपाया नहीं जा सकता। चूंकि अमेरिका में कोरोना से छह लाख लोग मरे हैं , इसलिए भारत में भी उसी अनुपात में मौतें दिखाने का प्रयास हुआ। भारत की जनसंख्या अमेरिका से 6-7 गुनी है। इसलिए उसने मौतों का आंकड़ा भी सात गुना कर डाला। इसी कारण भारत सरकार ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि किसी अखबार को झूठे आंकड़े नहीं छापने चाहिए। हालांकि संक्रामक बीमारियों की ​स्थिति पर नजर रखने के लिए तीन सरकारी सीरो सर्वे में भी दावा किया गया है कि भारत में कोविड मरीजों की संख्या आंकड़ों में आ रही संख्या से कहीं ज्यादा है। लेकिन 2 करोड़ संक्रमित बढ़कर 70 करोड़ तो नहीं ही हो सकते। बेशक सरकारी आंकड़े सच नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से विदेशी अखबारों में चिताओं के फोटो और अनुमानित आंकड़े छापे गए हैं, वे पिछले दिनों सामने आई कथित ‘कांग्रेसी टूलकिट’ का हिस्सा ही प्रतीत होते हैं। साथ ही, बच्चों को लेकर भी तीसरी लहर की आशंकाएं जताई जा रही हैं। समझना आसान नहीं है कि भारत के खिलाफ साजिश में विदेशी मीडिया, देश में छुपे देश के दुश्मन, अंतरराष्टÑीय दवा कंपनियां आदि कौन-कौन शामिल हैं? लेकिन इतना तो समझ आ ही रहा है कि यह षड्यंत्र बहुत बड़ा है और तेजी से मजबूत होते भारत को कमजोर करने का प्रयास है। टीकाकरण जैसे कदम उठाकर भारत को ऐसे षड्यंत्र को मात देनी होगी और इस महामारी से पहले की तुलना में अधिक मजबूत बनकर निकलना होगा।

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