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रोहिणी कोल कंपनी की जमाबंदी रद्द करने के आदेश पर हाइकोर्ट ने लगायी रोक

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रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने रोहिणी कोल कंपनी जमाबंदी रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से कहा गया कि सीएनटी एक्ट के तहत विभागीय मंत्री को जमीन की जमाबंदी रद्द करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार उपायुक्त के पास है। इस निर्देश के साथ झारखंड हाईकोर्ट ने भू राजस्व मंत्री के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें मंत्री ने रोहिणी कोल कंपनी की जमीन की जमाबंदी रद्द कर उसे रैयतों को वापस करने का आदेश दिया था। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। रोहिणी कोल कंपनी ने मंत्री के आदेश को हाइकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि कंपनी को हजारीबाग जिले में बड़कागांव, समेत पांच इलाके में कोल ब्लॉक मिला था। वर्ष 2014 में इसे रद्द कर दिया गया। इस बीच कुछ रैयतों ने सीएनटी एक्ट का हवाला देते हुए रैयतों को जमीन वापस करने का आग्रह किया था। इस पर भू-राजस्व मंत्री ने फैसला सुनाते हुए कंपनी की जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी और रैयतों को जमीन वापस करने का आदेश देते हुए दस्तावेज में भी संशोधन करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ कंपनी की ओर से हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी। कंपनी की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि कोल ब्लॉक मिलने के बाद कंपनी ने जमीन खरीदी थी। इसके बाद उपायुक्त के आदेश के बाद कंपनी के नाम से जमाबंदी की गयी। इस बीच कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द कर दिये जाने से कंपनी इस पर खनन कार्य शुरू नहीं कर सकी है। मामले में सरकार की ओर से मंत्री के आदेश को सही बताया गया और कहा गया है कोल कंपनी ने माइनिंग के लिए जमीन ली थी, लेकिन अभी तक माइनिंग शुरू नहीं की गयी है। ऐसे में जमीन की जमाबंदी रद्द कर रैयतों को वापस करने का अधिकार सरकार को है। सुनवाई के बाद अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिया।

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