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लाखों खर्च करने के बाद भी गरीबों को नहीं मिल रहे स्वास्थ्य सेवाएं

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विकेश महतो
पेशरार-लोहरदगा: केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार दोनों जन-जन तक स्वास्थ सेवा पहुंचाने की दंभ भरती रही हैं। कई योजनाओं को लांच किया जा रहा है। पांच लाख के मुफ्त इलाज के आयुष्मान योजनाएं चलाई जा रही है, तो बीपीएल कार्ड धारियों को 30 हजार तक इलाज प्राईवेट अस्पतालों में भी सुविधा प्रदान की गई। परन्तु ग्रांउड रिर्पोट की स्थिति काफी भयावह है। कहीं अस्पतालाें में दवा नहीं है तो कहीं डाक्टर और नर्स नहीं। कहीं का आलम यह है कि पिछले कई सालों से अस्पताल खुला ही नहीं है। लोगों को याद नहीं कि हमारे गांव में उप स्वास्थ केन्द्र भी है। आलम यह है कि संसाधनों और कर्मियों की कमी के कारण स्वास्थ्य केंद्र बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं।
आधा-अधूरा बनकर वर्षो से पड़ा है मॉडल अस्पताल

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अतिनक्सल प्रभावित पेशरार मुख्यालय में आठ-दस वर्षो पहले करोड़ों की लागत से एक मॉडल अस्पताल निर्माण कार्य शुरू हुई थी। लेकिन अधिकारियों, ठीकेदार व अभियंताओं के द्वारा राशि बंदरबांट का शिकार हो यह मॉडल अस्पताल आधा-अधूरा बनकर वर्षो से पड़ा हुआ है। जिसे देखने वाला न तो कोई जनप्रतिनिधि है और न ही कोई अधिकारी। अब इस अस्पताल की अधूरी बिल्डिंग को आठ-दस वर्ष हो गए, लेकिन इस अस्पताल की बिल्डिंग को देखने वाला कोई नहीं है। नतीजा ये हुआ कि ये भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बनकर रह गया है। कई लोग तो इसे बकरी शेड के रूप में भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

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खंडहरों में तब्दील हो चुके कई स्वास्थ्य केंद्र
स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भले ही प्रखंडों में केंद्र खुल गये हैं। परंतु सच्चाई यह कि कर्मियों और चिकित्सकों की कमी से आधे से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला झूलता नजर आते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं कई प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन ही खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं। अलबत्ता जनता दरबार और मंत्री या बड़े अधिकारियों के दौरे जैसे विशेष आयोजनों पर केंद्र खुलते जरूर हैं। लेकिन चिकित्सा सुविधा के लिए मरीजों को बाहर का रुख करना पड़ता है।
सिर्फ विशेष आयोजनों पर खुलते हैं स्वास्थ्य केंद्र
लोहरदगा जिले के अति नक्सल प्रभावित पेशरार प्रखंड में तो स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बदतर हालत हैं। यहां कुल पांच पंचायत  हैं। जहां प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र में मरीज देखने की सुविधा नहीं है। पेशरार मुख्यालय स्थित कानीटोली में स्थित प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र से मरीजों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। यहां न तो कोई नर्स आती हैं और न ही कोई डॉक्टर। शनिवार साप्ताहिक हाट के दिन कभी कभार केन्द्र में एक दो नर्स व स्टाफ आ जाते हैं औ एक-दो घंटे में बंद करके चले जाते हैं।
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