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गुरुद्वारा बंगला साहिब में अब एक घंटे में बन सकता है तीन लाख लोगों का लंगर

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नयी दिल्ली : अपनी निष्काम सेवा के लिए दुनिया भर में प्रख्यात दिल्ली का गुरुद्वारा बंगला साहिब इन दिनों अपने लंगर बनाने के तरीके को लेकर प्रशंसा बटोर रहा है।
गुरुद्वारा साहिब को मिल रही इस प्रशंसा की वजह उसकी आधुनिक रसोई है, जहां दो से तीन लाख लोगों के लिए लंगर एक घंटे में तैयार होता है, जबकि पहले इसमें तीन से चार घंटे लगते थे।
गुुरुद्वारा बंगला साहिब के लंगर प्रबंधक हरपेज ंिसह गिल ने यूनीवार्ता को बताया कि बंगला साहिब की रसोई में लंगर बनाने के लिए आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं जो विदेशों से लाईं गई हैं। दाल और सब्जी बनाने के लिए तीन फ्रायर और पांच आधुनिक कुकर यहां लाये गये हैं। एक कुकर में एक बार में 60 किलोग्राम कच्ची दाल डाल जाती है और 45 मिनट में 400 लीटर दाल तैयार हो जाती है। फ्रायर में सूखी सब्जी बनाई जाती है और इसमें एक घंटे में 300 किलोग्राम सब्जी और खीर तैयार होती है।
श्री हरपेज ंिसह ने बताया कि पिछले साल कोरोना काल में गुरुद्वारा साहिब में सेवादारों की कमी हो गई थी। कोरोना वायरस संक्रमण के डर से बहुत कम लोग सेवा करने आते थे। ऐसे में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने रसोई को आधुनिक बनाने पर विचार-विमर्श किया और 31 दिसंबर 2020 को आधुनिक रसोई बन कर तैयार हुई। उन्होंने बताया कि रसोई में लगीं आधुनिक मशीनों से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि ज्यादा सेवादारों की भी जरूरत नहीं पड़ती है।
डीएसजीएमसी के महासचिव हरमीत ंिसह कालका ने यूनीवार्ता से कहा,‘‘ लोग गुरु घर में आस्था के साथ आते हैं और उम्मीद करते हैं कि उन्हें यहां लंगर मिलेगा। कोरोना काल के दौरान जब लोगों तक लंगर पहुंचाया जा रहा था तो हमें लगा कि कम समय में ज्यादा लंगर बनना चाहिए, इसलिए हमने गुरुद्वारा बंगला साहिब की रसोई को आधुनिक करने का मन बनाया। लगभग छह महीनों में लंगर हॉल सहित रसोई को आधुनिक मशीनों से लैस किया गया। गुरु नानक देव जी ने पिता से व्यवसाय के लिए मिले 20 रुपए से साधु-संतों को भोजन कराया था। लंगर की प्रथा तभी से चलती आ रही है। इसी को आगे बढ़ाते हुए हमने लंगर की व्यवस्था को आज के समय के हिसाब से बेहतर करने का प्रयास किया है। गुरुद्वारा बंगला साहिब की रसोई वर्तमान में किसी भी समुदाय द्वारा चलाई जाने वाली सबसे बड़ी और आधुनिक रसोई है।’’ श्री हरपेज ने बताया कि रसोई में रोटी बनाने के लिए भी एक मशीन लगी हुई है। इसमें एक घंटे में चार हजार रोटियां बनती हैं। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से मानव रहित है, इसमें केवल गूंदा हुआ आटा डाला जाता है। मशीन में इसके पेढ़े होते हैं और बाद में इसे रोटी का आकार मिलता है। फिर दो स्तर पर आंच पर सिकने के बाद रोटी बनकर निकलती है।
लंगर प्रबंधक हरपेज ने बताया कि यहां आटा गूंथने के लिए भी आधुनिक मशीन है, जिसमें 50 किलो आटा मात्र 10 मिनट में गुंथ जाता है। उन्होंने कहा कि यह मशीन काफी उपयोगी है, क्योंकि पहले इतनी मात्रा में आटा गूंथने के लिए एक घंटे से अधिक समय लगता था।
उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में लंगर में 22 से 23 ंिक्वटल आटा लगता है, जबकि रविवार के दिन यह संख्या 34 ंिक्वटल तक हो जाती है। वहीं उनके मुताबिक सामान्य दिनों में 350 किलो चावल, 700 किलो दाल और 500 किलो सब्जी बनती है, जबकि रविवार को यह सब दोगुना और कई बार तिगना भी हो जाता है।
श्री हरपेज ने बताया कि सब्जी काटने के लिए भी मशीन उपलब्ध है, जहां पहले मैनुअल तरीके से सब्जी काटने में में चार-पांच घंटे और 15 से 20 सेवादार लगते थे, वहीं अब मशीन के जरिए एक व्यक्ति 30 मिनट में सब्जी काट लेता है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा आलू छीलने और साफ करने के लिए भी मशीन मौजूद है, जिसमें 50 किलो आलू 10 मिनट में कट और साफ हो जाते हैं। रसोई में कोल्ड स्टोरेज की भी व्यवस्था है, जहां एक हफ्ते तक सब्जियां रखी जा सकती हैं।
इसके अलावा स्वच्छता पर विशेष रूप से ध्यान देते हुए थालियां धोने के लिए विदेश से आधुनिक मशीन मंगाई है, जिसमें थाली ऐसे साफ होती हैं जैसे नयी थाली हो। खास बात यह है कि इससे पानी की बहुत ज्यादा बचत है, क्योंकि पहले पानी से थालियां धोई जाती थीं।
श्री हरपेज ने बताया कि लंगर 24 घंटे चलता है। तीन टीमें पूरे दिन सेवा करती हैं। पहली टीम सुबह छह से दोपहर दो बजे तक, दूसरी दोपहर दो से रात 10 और तीसरी टीम रात 10 से सुबह छह बजे तक सेवा करती है। उन्होंने बताया कि हमेशा ताजा लंगर बनाया जाता है। लंगर हॉल में एक समय में 800 लोग एक साथ लंगर छक सकते हैं।

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