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राज्यपाल रमेश बैस ने रांची में 174 ढुकू जोड़ों का कराया सामूहिक विवाह

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रांची। राज्यपाल रमेश बैस ने मोरहाबादी बिरसा मुंडा फुटबाल स्टेडियम में 174 ढुकू जोड़ों का विवाह कराया। उन्होंने नव विवाहित जोड़ों के सुखद भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि गांवों में लीव इन में रह रही महिलाओं को ढुकू बोल कर संबोधित किया जाता है। उन्हें पीने का पानी भी कुंआ से भरने दिया जाता है। सामाजिक संस्कारों से उन्हें अलग रखा जाता है। महिलाओं और बच्चे जरूरी दस्तावेज के नहीं रहने से सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इन महिलाओं को विवाह के रस्म में जोड़ने का डॉ निक‍िता सिन्हा ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। उन्होंने दो हजार जोड़ियों का विवाह कराया. डॉ निकिता सिन्हा सामाजिक कुरीति को दूर करने का बड़ा काम पिछले पांच वर्षों से कर रही है। ऐसे लोगों का रीति रिवाज से शादी कराया जा रहा है।

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1370 जोड़ों की शादी करायी गयी है। रांची, बसिया, गुमला, खूंटी में सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया है। सामाजिक कुरीति दूर करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि समाज में काफी जटिलताएं हैं। इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। समस्याएं काफी हैं, जोड़ों को चिह्नित कर विवाह कराना एक चुनौती है। इस पथ पर आप निरंतर आगे बढ़ रहे हैं, ताकि उनके बीच में हीन भावना न हो। संवाहक बनकर समाज सेवा कर रहे हैं। जो लड़का-लड़की लीव इन रीलेशन में रह रहे हैं, उन्हें वैवाहिक बंधन में बांधना जरूरी है। एक कोषांग बना कर गांव स्तर पर शादी समारोह आयोजित कर मान्यता दी जानी चाहिए. जिला प्रशासन को भी आगे आना चाहिए। कन्यादान योजना को और आगे बढ़ाना चाहिए। राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज बनवाने की दिशा में काम करनी चाहिए। सरकार द्वारा संचालित आजीविका विकास कार्यक्रमों से इन्हें जोड़ने की जरूरत है। जब तक समाज में मान्यता नहीं मिलती है, तब तक वैवाहिक रिवाज का कोई मतलब नहीं है।
इससे पहले निमित संस्था की डॉ निकिता सिन्हा ने कहा कि कई समस्याओं का सामना गांवों में करना पड़ता है। कई जगहों में पति भी छोड़ कर चले जाते हैं। कुंए से पानी भरने नहीं दिया जाता है। घर के पूजा संस्कारों में हिस्सा नहीं लेने दिया जाता है। छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, गुजरात, बंगाल, ओड़िशा, तेलांगना में इस तरह की समस्याएं महिलाओं को देखने को मिल रही है। इनका समाधान नहीं हो पा रहा है। इस समस्या का समाधान के लिए लोग हमसे पूछते हैं। यह एक बड़ी समस्या है। इस समस्या का निदान होना चाहिए।

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