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बीरू में घूम धाम से मनाई जा रही है गणेश चतुर्थी पर्व

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सिमडेगा: बीरू में मां भुवनेश्वरी सह बंगलामुखी मंदिर प्रांगण में पहली बार समिति के कार्यकतार्ओं के द्वारा कोविड़-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए भव्य पूजा पंडाल बनाकर गौरीनंदन श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर पुजारी नकुल दास जी के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की गई। विघ्नहर्ता मंगलमूर्ति श्री गणेश की पूजा से पूरे गांव का वातावरण भक्तिमय हो गया. मंगलवार को भव्य भंडारे का आयोजन किया जाने वाला है जिसमें सभी भक्त आमंत्रित हैं। भक्तगण लगातार पूजा पण्डाल में आकर दर्शन पूजन कर रहें हैं। गणेश पूजन को लेकर एक पौराणिक कथा भी है कि एक बार देवता कई विपदाओं में घिरे थे। तब वह मदद मांगने “भगवान शिव” के पास आए। उस समय “भगवान शिव” के साथ “श्री कार्तिकेयजी” तथा “श्री गणेशजी” भी बैठे थे। देवताओं की बात सुनकर शिव जी ने कार्तिकेय व गणेश जी से पूछा कि तुम में से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। तब श्री कार्तिकेय व श्री गणेश जी दोनों ने ही स्वयं को इस कार्य के लिए सक्षम बताया।इस पर भगवान शिव ने दोनों की परीक्षा लेते हुए कहा कि आप दोनों में से जो सबसे पहले “पृथ्वी की परिक्रमा” करके आएगा वही देवताओं की मदद करने जाएगा,भगवान शिव के मुख से यह वचन सुनते ही श्री कार्तिकेय अपने वाहन “मोर” पर बैठकर “पृथ्वी की परिक्रमा” के लिए निकल गए, परंतु गणेश जी सोच में पड़ गए कि वह “चूहे” के ऊपर चढ़कर “सारी पृथ्वी की परिक्रमा” करेंगे तो इस कार्य में उन्हें बहुत समय लग जाएगा। तभी उन्हें एक उपाय सूझा।श्री गणेश अपने स्थान से उठें और भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा करके वापस बैठ गए। परिक्रमा करके लौटने पर कार्तिकेय स्वयं को विजेता बताने लगे। तब शिव जी ने “श्री गणेश जी से पृथ्वी की परिक्रमा ना करने का कारण पूछा। तब “श्री गणेश जी ने कहा” माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।यह सुनकर भगवान शिव ने श्री गणेश जी को देवताओं के संकट दूर करने की आज्ञा दी। इस प्रकार भगवान शिव ने श्री गणेश जी को आशीर्वाद दिया कि “चतुर्थी” के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसके तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप तथा भौतिक ताप दूर होंगे,अत: इस कथा से “श्री गणेश जी” यही कहना चाहते है कि प्रत्येक मनुष्य माता – पिता की सेवा करें क्योंकि माता – पिता के चरणों मे ही समस्त लोक है, अत: माता – पिता की सेवा करने से समस्त सृष्टि के सुख प्राप्त होंगे।

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