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गुमदीबेड़ा गांव के ग्रामीण गंदा पानी पीने को विवश

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जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिला के मुसाबनी प्रखड़ कार्यालय से मात्र 10 किलो मीटर क्षेत्र के फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत के गुमदीबेड़ा गांव नक्शे में तो है लेकिन क्षेत्र के लोग आज भी पानी जैसी बुनियादी जरूरतों से जूझ रही है। गांव के ग्रामीण नरसिंह बानरा, छोटा नरसिंह बानरा, गोमिया बानरा व जीमा बानरा कहते है की बीते दो महीने पूर्व ब्रजपात से सोलर जलामीनार का मोटर जल गया। गांव में एक भी सरकारी कुआं नही है। क्षेत्र के चापाकल खराब पड़े हुए है। ऐसे से गांव के 54 आदिवासी परिवार पेयजल संकट से जूझ रहे है। फिलहाल नाला के नीचे बने छोटे से चहूं में बने गड्डे से ग्रामीण पानी उठाते है। इसी गड्डे से ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते है। गंदा पानी पीने से मलेरिया समेत अन्य बीमारियों की फैलाने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण बताते है की इस चहूं या गड्डे का पानी पांच लोग लेने के बाद वह भी सुख जाता है। जिसके बाद पानी भरने का लेकर घंटो इंतजार करना पड़ता है। कभी कभी बिना पानी लिए ग्रामीणों को वापस लौटना पड़ता है। ऐसे में उन्हें पानी को लेकर काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। बहरहाल देखना यह है की पदाधिकारी एवं जन प्रतिनिधियों की कब नजर बीहड़ पहाड़ के बीच बसे गुमदी बेड़ा के ग्रामीणों पर नजर पड़ती है।

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